संभावित अल नीनो की चुनौतियों से निपटने के लिए गड़चिरोली की जलसंरक्षण के माध्यम से मजबूत तैयारी
गडचिरोली : गड़चिरोली जिले में पिछले दो वर्षों के दौरान विभिन्न योजनाओं के माध्यम से बड़े पैमाने पर जलसंरक्षण कार्य किए गए हैं। इन कार्यों से जिले में पर्याप्त जल भंडारण क्षमता विकसित हुई है तथा भूजल पुनर्भरण को भी बढ़ावा मिला है। भविष्य में संभावित अल नीनो प्रभाव के कारण कम वर्षा अथवा जल संकट जैसी परिस्थितियां उत्पन्न होने पर इन जलसंरक्षण कार्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रहने वाली है। जिले में अब तक कुल 6,015 जलसंरक्षण कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं, जिनसे 18,750 टीसीएम जल भंडारण क्षमता का निर्माण हुआ है। वहीं, वर्तमान में प्रगति पर चल रहे कार्य पूरे होने के बाद अतिरिक्त 2,060 टीसीएम जल भंडारण क्षमता और विकसित होगी।
पूर्ण किए गए कार्यों में 1,329 बोरी गहरीकरण, 767 फलोद्यान विकास, 1,064 खेत तालाब, 323 गैबियन बांध, 387 रिचार्ज शाफ्ट, 207 कोल्हापुरी बांध तथा वन क्षेत्रों में वनराई बांध, वन तालाब और एलबीएस जैसे विभिन्न मृदा एवं जलसंरक्षण कार्य शामिल हैं। इन प्रयासों से वर्षा जल का अधिकाधिक संचयन संभव हुआ है तथा भूजल स्तर में सुधार दर्ज किया गया है।
जलयुक्त शिवार अभियान 2.0 के तहत 4,638 कार्य पूर्ण
जलयुक्त शिवार अभियान 2.0 के अंतर्गत जिले में 4,638 कार्य पूरे किए गए हैं, जिनसे 9,340 टीसीएम जल भंडारण क्षमता का निर्माण हुआ है। इस योजना के तहत बोरी गहरीकरण, खेत तालाब, मजगी, गैबियन बांध, वनराई बांध, रिचार्ज शाफ्ट, सीमेंट नाला बांध और तालाब मरम्मत जैसे कार्य किए गए हैं।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 से बढ़ी जल भंडारण क्षमता
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के अंतर्गत 1,042 कार्य प्रस्तावित किए गए हैं। इनमें बड़ी संख्या में खेत तालाब, मजगी, गैबियन बांध, डीप सीसीटी और एलबीएस कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं। इनसे 5,200 टीसीएम जल भंडारण क्षमता का निर्माण हुआ है।
इसके अलावा जिला खनिज निधि, गाळमुक्त धरण-गाळयुक्त शिवार योजना, जिला वार्षिक योजना तथा जिला वार्षिक आदिवासी उपयोजना के माध्यम से भी महत्वपूर्ण जलसंरक्षण कार्य किए गए हैं। गाळमुक्त धरण-गाळयुक्त शिवार योजना के तहत लाखों घनमीटर गाद निकासी कर जलाशयों की भंडारण क्षमता बढ़ाई गई है। जिला वार्षिक योजना से 5,319 टीसीएम तथा आदिवासी उपयोजना से 1,818 टीसीएम जल भंडारण क्षमता विकसित की गई है।
जिलाधिकारी अविश्यांत पंडा ने कहा कि, “जलवायु परिवर्तन और संभावित अल नीनो की स्थिति को देखते हुए जल सुरक्षा पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। पिछले दो वर्षों में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से विकसित जल भंडारण क्षमता और भूजल पुनर्भरण व्यवस्था भविष्य में संभावित जल संकट के प्रभाव को कम करने में सहायक सिद्ध होगी। लंबित जलसंरक्षण कार्यों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं तथा प्रशासन का विशेष ध्यान पानी की प्रत्येक बूंद को संरक्षित कर कृषि, पेयजल और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने पर रहेगा।”
जिले में विकसित की गई यह व्यापक जलसंरक्षण व्यवस्था केवल वर्षा जल संचयन तक सीमित नहीं है, बल्कि भूजल स्तर बढ़ाने, सिंचाई क्षमता मजबूत करने और ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। संभावित अल नीनो की चुनौती के मद्देनजर गड़चिरोली की यह जलसंरक्षण पहल भविष्य की जल समस्याओं से निपटने के लिए मजबूत आधार साबित हो सकती है।
रिपोर्टर : चंद्रशेखर पुलगम
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