353C राष्ट्रीय राजमार्ग पर विकास की पोल खुली: दो घंटे की बारिश में बहा डायवर्जन,जनता ने उठाए गंभीर सवाल
गड़चिरोली : गड़चिरोली जिले के अहेरी-सिरोंचा मार्ग पर स्थित 353C राष्ट्रीय राजमार्ग पर विकास कार्यों की वास्तविकता पहली ही बारिश में उजागर हो गई है। आलापल्ली से सिरोंचा तक जाने वाले इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग पर मोसम गांव के समीप निर्माणाधीन पुल के लिए बनाया गया अस्थायी डायवर्जन महज एक-दो घंटे की बारिश में पूरी तरह बह गया। घटना के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता, प्रशासनिक निगरानी और ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार पुल निर्माण का कार्य लंबे समय से अधूरा पड़ा हुआ है। बारिश शुरू होने से पहले ही निर्माण एजेंसी द्वारा नदी-नालों पर पुलों के लिए सड़क खोदकर डायवर्जन तैयार किए गए थे, लेकिन पर्याप्त सुरक्षा और तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया। नतीजतन, पहली ही बारिश में डायवर्जन बह गया और यातायात बाधित होने की स्थिति उत्पन्न हो गई।
पांच से छह वर्षों से अधूरा पड़ा है राष्ट्रीय राजमार्ग का काम
353C राष्ट्रीय राजमार्ग गड़चिरोली जिले की जीवनरेखा माना जाता है। यह मार्ग आलापल्ली, अहेरी और सिरोंचा क्षेत्र को जोड़ता है तथा हजारों नागरिक प्रतिदिन इसी सड़क से आवागमन करते हैं। बावजूद इसके, पिछले पांच से छह वर्षों से इस सड़क पर विभिन्न पुलों और सड़क निर्माण कार्यों का काम अधूरा पड़ा हुआ है।
जानकारी के अनुसार लगभग 100 किलोमीटर लंबे इस राजमार्ग के निर्माण कार्य के लिए तीन अलग-अलग ठेकेदारों की नियुक्ति की गई थी। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आज भी कई पुल और सड़कें अधूरी हैं। निर्माण कार्यों में लगातार हो रही देरी से आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बरसात की शुरुआत में ही खड़े हुए बड़े सवाल
मोसम गांव के पास डायवर्जन बहने की घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि केवल एक-दो घंटे की बारिश में यह स्थिति बन गई है, तो पूरे मानसून के दौरान इस मार्ग पर यातायात कैसे संचालित होगा? स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में यह मार्ग कई बार बंद हो सकता है, जिससे हजारों लोगों को परेशानी झेलनी पड़ेगी।
वाहन चालकों और ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि निर्माण एजेंसियों ने मानसून से पहले सुरक्षा उपायों और जल निकासी व्यवस्था को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई। इससे दुर्घटनाओं और जनहानि की आशंका भी बढ़ गई है।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को कई बार दिया गया ज्ञापन
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क निर्माण में हो रही देरी और गुणवत्ता संबंधी शिकायतों को लेकर कई बार जिला प्रशासन, राज्य सरकार तथा मुख्यमंत्री कार्यालय को ज्ञापन सौंपे गए। बावजूद इसके, न तो निर्माण कार्य में अपेक्षित तेजी आई और न ही जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई हुई।
नितिन गडकरी से हस्तक्षेप की मांग
क्षेत्र के नागरिकों ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री से सीधे हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग जैसे महत्वपूर्ण प्रकल्प की यह स्थिति न केवल विकास कार्यों पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि सरकारी धन के उपयोग और निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता पर भी गंभीर संदेह पैदा करती है।
जनता का सवाल—जिम्मेदार कौन?
पहली ही बारिश में बहा डायवर्जन, वर्षों से अधूरा पड़ा पुल निर्माण और करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जमीनी स्तर पर दिखाई दे रही अव्यवस्था ने जनता के मन में एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—आखिर इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है?
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि 353C राष्ट्रीय राजमार्ग के सभी अधूरे कार्यों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषी ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए तथा मानसून से पहले सभी संवेदनशील स्थलों पर सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
"अगर पहली बारिश में ही डायवर्जन बह सकता है, तो पूरे मानसून में इस सड़क की स्थिति क्या होगी? यह केवल निर्माण कार्य की विफलता नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का भी गंभीर उदाहरण है।"
रिपोर्टर : संजय यमसलवार
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