फर्जी वारिस बनकर करोड़ों की जमीन हड़पने की साजिश? गड़चिरोली में राजस्व रिकॉर्ड से छेड़छाड़ का आरोप
गड़चिरोली : गड़चिरोली जिले के सिरोंचा तहसील अंतर्गत जाफराबाद पॅच क्षेत्र की कृषि भूमि से जुड़े कथित फर्जी वारिस प्रकरण ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि एक महिला ने स्वयं को मृत भूमिधारकों का वारिस बताकर कथित रूप से फर्जी वारिस प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी राजस्व अभिलेख (7/12 उतारा) में अवैध रूप से अपना नाम दर्ज करा लिया और वर्षों से भूमि का लाभ उठाया।
इस संबंध में मधुकर मलय्या कोठारी एवं अर्जन्ना दुर्गय्या कोठारी, निवासी आसरेल्ली, तहसील सिरोंचा ने अतिरिक्त जिला प्रशासन, जिला पुलिस अधीक्षक तथा जिला भूमि अभिलेख कार्यालय के समक्ष विस्तृत शिकायत प्रस्तुत कर मामले की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, जाफराबाद पॅच शिवार के पुराने सर्वे क्रमांक 20/1 एवं 20/2 (नए सर्वे क्रमांक 74 एवं 75) की कृषि भूमि मूल रूप से स्वर्गीय कोठारी दुर्गय्या पोचम तथा स्वर्गीय कोठारी मलय्या पोचम की थी। आरोप है कि गैरअर्जदार मल्लक्का अर्जन्ना शिवाला ने स्वयं को उनका वारिस बताते हुए कथित रूप से फर्जी वारिस प्रमाणपत्र तैयार कराया और तत्कालीन तलाठी तथा मंडल अधिकारी के साथ मिलीभगत कर राजस्व अभिलेखों में अपना नाम दर्ज करा लिया।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि स्वर्गीय कोठारी दुर्गय्या पोचम एवं स्वर्गीय कोठारी मलय्या पोचम के कुल 12 वैध उत्तराधिकारी हैं तथा मल्लक्का अर्जन्ना शिवाला का उनसे किसी भी प्रकार का रक्त संबंध या कानूनी रिश्ता नहीं है। इसलिए उनका वारिस होने का दावा पूरी तरह गलत है।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि 30 जून 2023 को अधिवक्ता के माध्यम से भेजी गई एक कानूनी नोटिस में मल्लक्का अर्जन्ना शिवाला ने स्वर्गीय कोठारी मलय्या पोचम को अपना सगा भाई बताया था। वहीं दूसरी ओर, मुत्तापूर माल स्थित सर्वे क्रमांक 120 के 7/12 उतारे में उनका नाम स्वर्गीय दुर्गय्या शिवय्या काटेला की वारिस के रूप में दर्ज होने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि दोनों रिकॉर्ड की जांच से वास्तविक तथ्य सामने आ सकते हैं।
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि झूठी जानकारी और कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शासन को गुमराह कर राजस्व अभिलेखों में अवैध फेरबदल किया गया तथा उसी आधार पर संबंधित कृषि भूमि पर कब्जा कर लंबे समय तक आर्थिक लाभ प्राप्त किया गया, जिससे वास्तविक कानूनी वारिसों को भारी नुकसान हुआ।
शिकायतकर्ताओं ने यह भी मांग की है कि पूरे प्रकरण में तत्कालीन संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाए। यदि किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता पाई जाती है तो उनके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा अन्य लागू कानूनों के तहत आपराधिक कार्रवाई की जाए।
शिकायत के साथ पुराने एवं नए 7/12 उतारे, वास्तविक वारिस प्रमाणपत्र, कथित फेरबदल से जुड़े दस्तावेज, कानूनी नोटिस तथा अन्य संबंधित प्रमाण भी संलग्न किए गए हैं।
विशेष बात यह रही कि शिकायतकर्ताओं ने अतिरिक्त जिलाधिकारी गड़चिरोली, जिला पुलिस अधीक्षक गड़चिरोली तथा जिला भूमि अधीक्षक (भूमि अभिलेख) से प्रत्यक्ष मुलाकात कर उन्हें लिखित शिकायत सौंपी और मामले में त्वरित, निष्पक्ष एवं कठोर कार्रवाई की मांग की।
फिलहाल संबंधित प्रशासन की ओर से शिकायत प्राप्त होने के बाद जांच की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी।
रिपोर्टर : चंद्रशेखर पुलगम
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