जिद के आगे हर मुश्किल हुई बेबस! रूस से एमबीबीएस और एफएमजीई पास कर डॉ. साक्षी मद्दर्लवार ने पूरा किया डॉक्टर बनने का सपना
गडचिरोली : पिता के निधन का गहरा आघात, विदेश में संघर्ष और वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद हासिल की सफलता; अब भारत में चिकित्सा सेवा के लिए तैयार यदि लक्ष्य बड़ा हो तो चुनौतियां भी बड़ी होती हैं, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर हर कठिनाई को पार किया जा सकता है। इसका जीवंत उदाहरण गड़चिरौली जिले के अहेरी तहसील अंतर्गत नागेपल्ली गांव की डॉ. साक्षी किशोर मद्दर्लवार हैं। उन्होंने रूस के Privolzhsky Research Medical University, Nizhny Novgorod से एमबीबीएस की पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद भारत की Foreign Medical Graduate Examination (FMGE) परीक्षा भी उत्तीर्ण कर अपने बचपन का डॉक्टर बनने का सपना साकार कर लिया है।
बचपन से ही समाज की सेवा करने और चिकित्सा क्षेत्र में अपना योगदान देने का सपना देखने वाली साक्षी को उनके माता-पिता और भाई ने हर कदम पर प्रोत्साहित किया। परिवार ने उन पर विश्वास जताते हुए उन्हें उच्च शिक्षा के लिए रूस भेजने का साहसिक निर्णय लिया। परिवार के इसी विश्वास ने उनके सपनों को नई उड़ान दी।
रूस पहुंचने के बाद उनके सामने कई नई चुनौतियां थीं। नई भाषा, अलग संस्कृति, कठोर मौसम और अपरिचित वातावरण में खुद को ढालना आसान नहीं था। शुरुआत में रूसी भाषा सीखना उनके लिए सबसे बड़ी कठिनाइयों में से एक था। लेकिन उन्होंने लगातार मेहनत और लगन के साथ रूसी भाषा पर अच्छी पकड़ बनाई और मेडिकल की पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी की।
एमबीबीएस के छह वर्षों के दौरान उनके जीवन में सबसे बड़ा दुख तब आया, जब तीसरे वर्ष में उनके पिता का निधन हो गया। इस घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया। पिता के निधन का गहरा आघात सहने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपने पिता के सपने को पूरा करने का संकल्प लिया और पहले से अधिक दृढ़ निश्चय के साथ पढ़ाई जारी रखी। यही संघर्ष उनकी सफलता की सबसे बड़ी प्रेरणा बन गया।
रूस में अध्ययन के दौरान उन्हें केवल चिकित्सा विज्ञान का ज्ञान ही नहीं मिला, बल्कि अनुशासन, धैर्य, कठिन परिश्रम और वैश्विक दृष्टिकोण भी प्राप्त हुआ। एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त करना उनके जीवन का सबसे यादगार क्षण रहा। इसके बाद भारत में चिकित्सा व्यवसाय करने के लिए आवश्यक एफएमजीई परीक्षा में सफलता हासिल कर उन्होंने अपने करियर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पार किया।
अब डॉ. साक्षी मद्दर्लवार भारत में इंटर्नशिप, मेडिकल लाइसेंस की प्रक्रिया तथा आगे स्नातकोत्तर (पीजी) चिकित्सा शिक्षा की तैयारी में जुटी हुई हैं। उनका उद्देश्य एक कुशल चिकित्सक बनकर समाज, विशेषकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।
डॉ. साक्षी की इस उपलब्धि पर क्षेत्रभर से उन्हें शुभकामनाएं और बधाइयां मिल रही हैं। उनका संघर्ष और सफलता ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सपनों का पीछा करने वाले हर युवा के लिए उनका जीवन एक मिसाल है।
डॉ. साक्षी मद्दर्लवार ने विद्यार्थियों को दिया प्रेरणादायी संदेश
डॉ. साक्षी ने कहा,
"डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने के लिए मुझे कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। विदेश में रहकर पढ़ाई करना, परिवार से दूर रहना और पढ़ाई के दौरान पिता को खो देना मेरे जीवन का सबसे कठिन दौर था। लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी। मेरी मां, मेरे दिवंगत पिता और मेरे भाई का विश्वास और सहयोग ही मेरी सबसे बड़ी ताकत रहा। मैं सभी विद्यार्थियों से कहना चाहती हूं कि खुद पर विश्वास रखें, अनुशासन और निरंतर मेहनत को अपनी आदत बनाएं। दूसरों से तुलना करने के बजाय अपने लक्ष्य पर ध्यान दें। हर व्यक्ति का संघर्ष अलग होता है और आज की मेहनत ही कल की सफलता की मजबूत नींव बनती है।"
रिपोर्टर : संजय यमसलवार
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