गड़चिरोली में जिला स्तरीय 'विश्व जनसंख्या दिवस' उत्साहपूर्वक मनाया गया

गड़चिरोली : सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग, गड़चिरोली के समन्वय तथा जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रताप शिंदे एवं जिला शल्य चिकित्सक डॉ. वर्षा लहाड़े के मार्गदर्शन में शुक्रवार (11 जुलाई 2026) को जिला स्तरीय विश्व जनसंख्या दिवस का उद्घाटन समारोह जिला अस्पताल परिसर में उत्साहपूर्वक आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसके बाद अतिथियों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन अतिरिक्त जिला शल्य चिकित्सक डॉ. छाया उईके के हाथों संपन्न हुआ। इस अवसर पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. माधुरी किलनाके, जिला मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव शिंदे, रेडियोलॉजिस्ट डॉ. नीलकंठ मसराम, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत पेंदाम तथा सहायक अधिसेविका श्रीमती कविता पोतरोजवार प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण नर्सिंग प्रशिक्षणार्थियों द्वारा बनाई गई आकर्षक रंगोली रही। रंगोली के माध्यम से बढ़ती जनसंख्या, उसके दुष्परिणाम तथा परिवार नियोजन के महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों एवं नागरिकों ने इस रचनात्मक पहल की सराहना की।

उद्घाटन अवसर पर संबोधित करते हुए अतिरिक्त जिला शल्य चिकित्सक डॉ. छाया उईके ने कहा कि बढ़ती जनसंख्या पर नियंत्रण के लिए युवा पीढ़ी को आगे आकर छोटे एवं स्वस्थ परिवार की अवधारणा को अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि परिवार नियोजन ही संतुलित एवं स्वस्थ समाज की आधारशिला है और प्रत्येक परिवार को इसकी आवश्यकता एवं महत्व को समझना चाहिए।

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. माधुरी किलनाके ने कहा कि आशा कार्यकर्ता एवं एएनएम को घर-घर जाकर दो बच्चों के बीच उचित अंतर रखने के लाभ तथा उपलब्ध परिवार नियोजन साधनों की जानकारी देकर व्यापक जनजागरण करना चाहिए। इससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ स्वस्थ समाज के निर्माण में भी मदद मिलेगी।

कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए जिला मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव शिंदे ने "डेमोग्राफिक डिविडेंड" (जनसंख्या लाभांश) की अवधारणा को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने बताया कि जब किसी देश में 15 से 64 वर्ष आयु वर्ग की कार्यशील आबादी अधिक और आश्रित बच्चों एवं बुजुर्गों की संख्या अपेक्षाकृत कम होती है, तब उसे जनसंख्या का स्वर्णकाल कहा जाता है। भारत के लिए यह अवधि वर्ष 2005 से 2055 तक मानी गई है, जबकि इसका सर्वोच्च लाभ वर्ष 2030 से 2035 के बीच मिलने की संभावना है।

उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र की 65 प्रतिशत से अधिक आबादी कार्यशील आयु वर्ग में है। गड़चिरोली जैसे जिले में भी युवाओं की संख्या अधिक है, लेकिन यदि उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, कौशल विकास और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं, तभी जनसंख्या लाभांश को विकास में बदला जा सकेगा। अन्यथा यह अवसर बेरोजगारी और सामाजिक चुनौतियों के रूप में बड़े संकट में परिवर्तित हो सकता है। इस जिला स्तरीय कार्यक्रम में अस्पताल के अधिकारी एवं कर्मचारी, स्टाफ नर्स, अधिपरिचारिकाएं, आशा कार्यकर्ता, नर्सिंग ट्यूटर, प्रशिक्षणार्थी, मरीज एवं उनके परिजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन श्रीमती प्रतिज्ञा रामटेके (पीएचएन) ने किया।

रिपोर्टर : संजय यमसलवार 
 

 

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