गड़चिरौली जिले की धान भंडारण व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

गड़चिरौली :  जिले के अहेरी तहसील स्थित पेरमिल्ली धान खरीदी केंद्र पर पिछले दो वर्षों से हजारों क्विंटल धान खुले आसमान के नीचे पड़े-पड़े खराब हो रहा है। इससे पहले कमलापुर धान खरीदी केंद्र पर भी ऐसी ही स्थिति सामने आई थी। विशेष बात यह है कि जिले के अनेक धान खरीदी केंद्रों पर हर वर्ष हजारों क्विंटल धान खुले में पड़ा रहकर खराब होने की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं, जिससे शासन की धान भंडारण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पेरमिल्ली धान खरीदी केंद्र पर धान के साथ-साथ सैकड़ों बारदाने भी खुले में पड़े होकर खराब हो रहे हैं। सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था नहीं होने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है या इसके पीछे कोई अन्य कारण है, ऐसा सवाल नागरिक उठा रहे हैं। सार्वजनिक धन से खरीदे गए बारदानों का इस प्रकार खराब होना एक गंभीर मामला माना जा रहा है।

जिले के अधिकांश धान खरीदी केंद्रों पर हर वर्ष धान खुले में पड़े-पड़े सड़ता रहता है, फिर भी शासन और संबंधित विभाग स्थायी समाधान क्यों नहीं कर रहे हैं, यह बड़ा प्रश्न बन गया है। धान के सुरक्षित भंडारण के लिए आवश्यक गोदामों का निर्माण क्यों नहीं किया जाता? क्या धन या भूमि की कमी को इसका कारण माना जा सकता है? नागरिक यह भी सवाल उठा रहे हैं कि जब अन्य विकास कार्यों के लिए निधि उपलब्ध हो सकती है, तो किसानों की मेहनत की उपज को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता क्यों नहीं दी जाती?

इस पूरे मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ई-नीलामी होने के बाद भी खरीदार समय पर माल का उठाव नहीं करते, ऐसा बताया जाता है। लेकिन जब लगभग हर वर्ष जिले के कई धान खरीदी केंद्रों पर यही स्थिति देखने को मिलती है, तो इस पूरी प्रक्रिया पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। करोड़ों रुपये का धान ई-नीलामी के माध्यम से खरीदे जाने के बावजूद समय पर उसका उठाव क्यों नहीं किया जाता? इसके पीछे वास्तविक कारण क्या हैं? इन सभी पहलुओं की गहन जांच की मांग की जा रही है।

कुछ नागरिकों ने यह आशंका भी व्यक्त की है कि धान और बारदानों का लंबे समय तक खुले में पड़े रहना कहीं बीमा दावों, प्रशासनिक अनियमितताओं अथवा अन्य संभावित वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़ा मामला तो नहीं है। हालांकि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाई जानी चाहिए।

हर वर्ष हजारों क्विंटल धान खराब होने के बावजूद इसकी जिम्मेदारी किसकी तय की गई, संबंधित अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई, खुले में पड़े धान के खराब होने से शासन को कितना आर्थिक नुकसान हुआ तथा भविष्य में ऐसी स्थिति रोकने के लिए कौन-सी ठोस कार्ययोजना बनाई जाएगी, इसकी स्पष्ट जानकारी शासन को जनता के सामने रखनी चाहिए, ऐसी मांग अब जोर पकड़ रही है।

किसानों के पसीने और मेहनत से तैयार धान की सुरक्षा करना शासन की जिम्मेदारी है। इसलिए पेरमिल्ली, कमलापुर तथा जिले के अन्य सभी धान खरीदी केंद्रों की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए तथा भविष्य में धान और बारदानों को खुले में पड़े-पड़े खराब होने से रोकने के लिए आधुनिक गोदामों और सुरक्षित भंडारण व्यवस्था का तत्काल निर्माण किया जाए, ऐसी मांग नागरिकों ने की है।

कोट :
महाराष्ट्र राज्य सहकारी आदिवासी विकास महामंडल, उप-प्रादेशिक कार्यालय अहेरी के उप-प्रादेशिक प्रबंधक श्री एस. एल. राजुरे से संपर्क करने के लिए फोन किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। इससे पहले भी कमलापुर धान खरीदी केंद्र के संबंध में संपर्क करने का प्रयास किया गया था, तब भी उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

कोट :
"पिछले दो वर्षों से टेंडर नहीं होने के कारण धान का भंडारण करना पड़ा। इस वर्ष ई-नीलामी हो चुकी है, लेकिन अभी तक माल का उठाव नहीं किया गया है। वर्ष 2023-24 के बारदाने खराब हो जाने के कारण उन्हें गोदाम परिसर में अलग रख दिया गया है।"

— रोशन येगोलपवार, सचिव, पेरमिल्ली धान खरीदी केंद्र


रिपोर्टर : प्रशांत नामनवार 

 

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