गडचिरोली में संभागीय मत्स्य व्यवसाय प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना को मंजूरी
गडचिरोली : गडचिरोली जिले में मत्स्य व्यवसाय को आधुनिक तकनीक से जोड़कर स्थानीय मछुआरों, मत्स्य पालकों, आदिवासी समुदाय और बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। गडचिरोली तहसील के कनेरी में संभागीय मत्स्य व्यवसाय प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने को शासन ने मंजूरी दे दी है।
इस केंद्र की स्थापना के लिए विधायक डॉ. मिलिंद नरोटे ने मत्स्य व्यवसाय एवं बंदरगाह मंत्री नितेश राणे के समक्ष लगातार प्रयास किए और मंत्रालय में बैठक आयोजित कराने के लिए पहल की।
मत्स्य व्यवसाय एवं बंदरगाह मंत्री नितेश राणे की अध्यक्षता में मंत्रालय स्थित उनके कक्ष में इस संबंध में बैठक हुई। बैठक में विधायक डॉ. मिलिंद नरोटे, मत्स्य व्यवसाय विभाग के सचिव एन. रामास्वामी, मत्स्य व्यवसाय आयुक्त प्रेरणा देशभ्रतार सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
मंत्री नितेश राणे ने कहा कि गडचिरोली जिले में मत्स्य व्यवसाय की बड़ी संभावनाएं हैं। उपलब्ध जलसंपदा का प्रभावी उपयोग करने के लिए आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण को बढ़ावा देना आवश्यक है। उन्होंने स्थानीय मछुआरों एवं युवाओं को आधुनिक मत्स्य पालन का प्रशिक्षण देकर सक्षम बनाने के लिए प्रस्तावित केंद्र का काम तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही आवश्यक भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया तत्काल पूरी करने के निर्देश भी दिए।
गडचिरोली जिले में जिला परिषद के 1,645 तालाब, 23 सिंचाई तालाब, 2 हजार से अधिक खेत तालाब तथा अन्य निजी जलस्रोत उपलब्ध हैं। इन जलस्रोतों के कारण जिले में 6,500 हेक्टेयर से अधिक जलक्षेत्र मत्स्य पालन के लिए उपलब्ध है। हालांकि अधिकांश मछुआरे अभी भी पारंपरिक पद्धति से मत्स्य व्यवसाय कर रहे हैं। इसलिए मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक और कौशल विकास प्रशिक्षण की आवश्यकता है।
इसी पृष्ठभूमि में कनेरी स्थित शासकीय दूध शीतकरण केंद्र के अधिकार क्षेत्र में आने वाली 2.89 हेक्टेयर अनुपयोगी भूमि मत्स्य व्यवसाय विभाग को उपलब्ध कराने को शासन ने मंजूरी दी है। इस भूमि पर संभागीय मत्स्य व्यवसाय प्रशिक्षण केंद्र के साथ आधुनिक मत्स्य बीज केंद्र और आवश्यक अन्य सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव है।
यह केंद्र प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना का जिले के मछुआरों एवं मत्स्य पालकों को अधिक प्रभावी लाभ दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
केंद्र में आधुनिक मत्स्य पालन, मत्स्य बीज उत्पादन, मत्स्य आहार प्रबंधन, मिट्टी एवं पानी परीक्षण, मत्स्य रोग निदान तथा मत्स्य प्रसंस्करण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रस्तावित प्रशिक्षण केंद्र में आधुनिक प्रशिक्षण सभागार, ऑडियो-विजुअल शिक्षण सुविधा, मत्स्य आहार एवं पोषण प्रयोगशाला, मिट्टी एवं पानी परीक्षण प्रयोगशाला, किसान मार्गदर्शन एवं सलाह केंद्र, प्रशिक्षणार्थियों के लिए छात्रावास, सूचना एवं तकनीकी साहित्य केंद्र, मत्स्य रोग निदान प्रयोगशाला, पुनर्चक्रित जलसंवर्धन प्रणाली का प्रदर्शन केंद्र तथा लघु मत्स्य प्रसंस्करण केंद्र जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि नागपुर स्थित महाराष्ट्र पशु एवं मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय के मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय परिसर में संभागीय मत्स्य व्यवसाय प्रशिक्षण एवं सुविधा केंद्र का काम मई 2026 से शुरू है। इसलिए नागपुर में एक और स्वतंत्र केंद्र बनाने के बजाय वहां उपलब्ध सुविधाओं का उपयोग करते हुए आदिवासीबहुल गडचिरोली जिले में संभागीय प्रशिक्षण केंद्र विकसित किया जाए।
इस प्रशिक्षण केंद्र के माध्यम से जिले की उपलब्ध जलसंपदा का मत्स्य उत्पादन के लिए अधिक प्रभावी उपयोग हो सकेगा। साथ ही आधुनिक तकनीक स्थानीय मछुआरों तक पहुंचेगी, मत्स्य उत्पादन एवं मछुआरों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार तथा स्वरोजगार के नए अवसर निर्माण होंगे।
रिपोर्टर : चंद्रशेखर पुलगम
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