लाखों खर्च, फिर भी शुद्ध पानी से वंचित गोमणी
गडचिरोली : मुख्यमंत्री ग्राम सामाजिक परिवर्तन अभियान के अंतर्गत वर्ष 2019-20 में गोमणी ग्राम पंचायत परिसर में ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लाखों रुपये खर्च कर RO प्लांट स्थापित किया गया था। लेकिन आज यही प्लांट सरकारी व्यवस्था की उदासीनता का जीता-जागता उदाहरण बनकर रह गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले पांच से छह वर्षों से RO प्लांट का उचित उपयोग नहीं हो रहा है। प्लांट में लगाई गई मशीनें धूल खा रही हैं, जबकि जिस उद्देश्य से शासन ने लाखों रुपये खर्च किए थे, वह उद्देश्य आज तक पूरा नहीं हो सका है।
पानी के इंतजार में बीते साल, प्लांट बना शोपीस
गोमणीवासियों को उम्मीद थी कि RO प्लांट शुरू होने के बाद उन्हें स्वच्छ और शुद्ध पेयजल उपलब्ध होगा। लेकिन कई वर्ष बीत जाने के बाद भी ग्रामीणों की यह उम्मीद पूरी नहीं हुई। सरकारी निधि से तैयार किया गया प्लांट आज बंद पड़ा है और ग्रामीण शुद्ध पानी की सुविधा से वंचित हैं।
प्लांट के आसपास झाड़ियां और पेड़-पौधे उग आए हैं। वहीं मशीनरी भी लंबे समय से उपयोग के अभाव में पड़ी दिखाई दे रही है। इससे प्लांट के रखरखाव और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सरकारी पैसा खर्च हुआ, लेकिन जनता को लाभ कब?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब लाखों रुपये खर्च कर RO प्लांट स्थापित किया गया था, तो आखिर इसे नियमित रूप से चालू क्यों नहीं रखा गया? प्लांट के रखरखाव पर अब तक कितना खर्च हुआ? मशीनें किस स्थिति में हैं? बिजली और पानी की व्यवस्था क्यों बंद है? इन सभी सवालों के जवाब ग्रामीण प्रशासन से मांग रहे हैं।
गोमणीवासियों का कहना है कि सरकार की योजनाओं का उद्देश्य आम जनता को सुविधा उपलब्ध कराना है, न कि सरकारी भवनों और मशीनों को वर्षों तक बंद रखकर उन्हें शोपीस बना देना।
जांच कर RO प्लांट तत्काल शुरू करने की मांग
ग्रामीणों ने संबंधित ग्राम पंचायत एवं प्रशासन से मांग की है कि RO प्लांट पर खर्च की गई राशि, उसकी वर्तमान स्थिति, रखरखाव और पिछले वर्षों में हुए खर्च की जांच की जाए तथा प्लांट को तत्काल शुरू कर ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए।
अब देखना यह होगा कि वर्षों से धूल खा रहा यह लाखों रुपये का RO प्लांट कब शुरू होता है और गोमणीवासियों को शुद्ध पानी कब मिलता है?
रिपोर्टर : मारोती कोलावार
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