सिरोंचा में खाद की किल्लत और बढ़ते परिवहन खर्च से कृषि केंद्र संचालक परेशान

गडचिरोली - सिरोंचा तहसील में कार्यरत 60 से अधिक कृषि केंद्र संचालकों ने खाद की आपूर्ति, परिवहन व्यवस्था, ‘लिंकिंग’ तथा ई-पॉस मशीन से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी एवं जिला परिषद के कृषि विकास अधिकारी को निवेदन सौंपा है। निवेदन में किसानों को समय पर और नियमित रूप से खाद उपलब्ध कराने के साथ कृषि केंद्र संचालकों की समस्याओं का तत्काल समाधान करने की मांग की गई है। कृषि केंद्र संचालकों के अनुसार, सिरोंचा तहसील में खाद की अधिकांश आपूर्ति वडसा रैक से होती है। वडसा रैक से सिरोंचा तक की दूरी अधिक होने के कारण खाद की ढुलाई में भारी खर्च उठाना पड़ता है। कई बार माल ढुलाई के लिए वाहन उपलब्ध नहीं होते, जिसके कारण अतिरिक्त किराया देकर वाहन मंगाने पड़ते हैं। इससे खाद की वास्तविक लागत के साथ परिवहन खर्च भी बढ़ जाता है।

सिरोंचा–आलापल्ली मार्ग की खराब स्थिति बनी बड़ी बाधा

निवेदन में बताया गया है कि सिरोंचा–आलापल्ली मार्ग की खराब स्थिति के कारण विशेषकर बारिश के मौसम में खाद से भरे वाहन सिरोंचा तक पहुंचने में कठिनाई का सामना करते हैं। इसके चलते कई बार तेलंगाना मार्ग से खाद मंगानी पड़ती है, जिससे परिवहन खर्च और बढ़ जाता है। कृषि केंद्र संचालकों का कहना है कि जनवरी 2026 से रामागुंडम रैक के माध्यम से कुछ मात्रा में खाद उपलब्ध हुई थी, लेकिन बाद में यह आपूर्ति भी बंद हो गई। इसके अलावा बड़ी मात्रा में ‘लिंकिंग’ माल थोपे जाने से रामागुंडम रैक से खाद मंगाने का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।

अधूरे पुल के कारण गांवों तक खाद पहुंचाना मुश्किल

कंचनपेठा क्षेत्र में पुल का निर्माण अधूरा होने से आसपास के गांवों में खाद पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। मुख्य मार्ग से ट्रैक्टर अथवा छोटे वाहनों के जरिए खाद पहुंचाने में अतिरिक्त समय और खर्च लगता है। कई स्थानों पर एक वाहन से दूसरे वाहन में खाद स्थानांतरित करनी पड़ती है, जिससे दुकानदारों के साथ-साथ किसानों पर भी आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

‘लिंकिंग’ से लाखों रुपये का माल अटका

कृषि केंद्र संचालकों ने आरोप लगाया कि शासन द्वारा खाद कंपनियों की ‘लिंकिंग’ बंद करने संबंधी निर्णय लिए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर इसका पूरी तरह पालन नहीं हो रहा है। कुछ कंपनियों द्वारा छोटे दुकानदारों पर अनावश्यक माल लेने का दबाव बनाए जाने का दावा किया गया है। इसके कारण कई दुकानदारों के पास करीब 50 से 60 लाख रुपये मूल्य का अनावश्यक खाद एवं अन्य माल पिछले वर्षों से बिक्री के बिना पड़ा होने की बात निवेदन में कही गई है।

अंकिसा क्षेत्र में कथित झूठी शिकायतों पर भी आपत्ति

निवेदन में अंकिसा क्षेत्र के कृषि केंद्र संचालकों ने कथित रूप से झूठी शिकायतों का मुद्दा भी उठाया है। संचालकों का कहना है कि कुछ शिकायतें ऐसी संस्थाओं अथवा संगठनों के नाम से की जा रही हैं, जिनका स्थानीय स्तर पर अस्तित्व नहीं है। साथ ही राजनीतिक कार्यकर्ताओं द्वारा पुलिस विभाग में शिकायतें किए जाने तथा दुकानदारों को पुलिस थाने बुलाए जाने से उन्हें मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संचालकों ने इस प्रकार की शिकायतों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

ई-पॉस मशीन की समस्या से भी बिक्री प्रभावित

खाद बिक्री के लिए आवश्यक ई-पॉस मशीनों में नेटवर्क की समस्या के कारण भी कृषि केंद्र संचालकों को परेशानी उठानी पड़ रही है। कई बार मशीन समय पर काम नहीं करती, जबकि मशीन में तकनीकी खराबी के बावजूद किसानों को खाद देने का दबाव रहता है। इससे दुकानदारों और किसानों के बीच विवाद की स्थिति पैदा होने की बात निवेदन में कही गई है।

कृषि केंद्र संचालकों की प्रमुख मांगें

कृषि केंद्र संचालकों ने मांग की है कि चंद्रपुर एवं वडसा रैक से खाद की आपूर्ति बढ़ाई जाए और अतिरिक्त परिवहन खर्च की भरपाई शासन स्तर से की जाए। रामागुंडम रैक से भी खाद उपलब्ध कराकर किसानों को सरकारी दर पर बिक्री की व्यवस्था की जाए। इसके अलावा ‘लिंकिंग’ बंद करने के निर्णय को केवल कागजों तक सीमित न रखते हुए कंपनियों एवं डीलरों द्वारा की जा रही कथित लिंकिंग तत्काल बंद कराई जाए। संचालकों ने प्रशासन से उनकी समस्याओं का संज्ञान लेकर सुरक्षित, नियमित और पर्याप्त खाद आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा अनावश्यक दबाव एवं शिकायतों पर उचित कार्रवाई करने की मांग की है।

रिपोर्टर - चंद्रशेखर पुलगम

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