दुर्गम गडचिरोली में बच्चों के पोषण और सुरक्षित परवरिश की बड़ी पहल

गडचिरोली : जिले के दुर्गम और आदिवासीबहुल क्षेत्रों में तीन वर्ष से कम उम्र के बच्चों को बेहतर पोषण, स्वास्थ्य, सुरक्षित देखभाल और प्रारंभिक बाल विकास की सुविधाएं गांव स्तर पर उपलब्ध कराने के लिए 45 समुदाय आधारित पालना घर शुरू किए जाएंगे। इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत पहले पालना घर का उद्घाटन एटापल्ली तहसील के पैमा गांव में जिलाधिकारी अविश्यांत पंडा के हाथों किया गया।

इस अवसर पर जिलाधिकारी पंडा ने क्षेत्रीय दौरे के दौरान बुर्गी में डीएमएफ निधि से चल रहे कार्यों, तोडसा आश्रमशाला की नई इमारत के निर्माण और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया। इसके अलावा नागुलवाही में सड़क निर्माण कार्य की प्रत्यक्ष जांच कर उसकी गुणवत्ता भी परखी।

कार्यक्रम में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुहास गाडे, सहायक जिलाधिकारी तथा एटापल्ली के उपविभागीय अधिकारी अमर राऊत, भामरागड के उपविभागीय अधिकारी शुभम पाटील, सहायक जिलाधिकारी अजय डोके, टाटा ट्रस्ट्स की जयीता चौधरी, निलेश यादव, तहसीलदार हेमंत गांगुर्डे सहित महिला एवं बाल विकास, राजस्व, स्वास्थ्य तथा अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

 बच्चों के लिए पोषण से लेकर प्रारंभिक विकास तक सुविधा

जिला प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग, महाराष्ट्र शासन और टाटा ट्रस्ट्स के बीच हुए समझौते के तहत ‘बाल पोषण एवं विकास उपक्रम’ लागू किया जा रहा है। टाटा ट्रस्ट्स के सहयोग से मोबाइल क्रेचेस फॉर वर्किंग मदर्स चिल्ड्रेन संस्था द्वारा एटापल्ली तहसील में इस पहल को अमल में लाया जा रहा है।

पोषण माह की पृष्ठभूमि में शुरू किए गए इन पालना घरों में बच्चों को सुरक्षित वातावरण, पौष्टिक एवं विविध आहार, स्वास्थ्य व स्वच्छता की देखभाल तथा उम्र के अनुसार प्रारंभिक विकास की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

इससे माताओं को बच्चों की सुरक्षित देखभाल की चिंता किए बिना रोजगार, आजीविका और अन्य जरूरी जिम्मेदारियों के लिए समय मिल सकेगा।

 दुर्गम गांवों के बच्चों तक पहुंचेगी सरकारी सुविधा

गडचिरोली जिले में आदिवासी आबादी का बड़ा हिस्सा निवास करता है। एटापल्ली तहसील में 197 से अधिक गांव हैं और इनमें कई गांव दुर्गम तथा वन क्षेत्र में स्थित हैं। भौगोलिक कठिनाइयों के कारण सरकारी स्वास्थ्य एवं बाल विकास सेवाओं को परिवारों तक पहुंचाने में कई बार मुश्किलें आती हैं।

इसी को ध्यान में रखते हुए समुदाय स्तर पर पालना घर शुरू करने की पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जिलाधिकारी अविश्यांत पंडा ने कहा कि भौगोलिक दुर्गमता के कारण कोई भी बच्चा स्वास्थ्य सेवा, पर्याप्त एवं विविध पोषण तथा सुरक्षित संगोपन से वंचित नहीं रहना चाहिए। इस साझेदारी के माध्यम से बच्चों के स्वस्थ भविष्य की मजबूत नींव तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।

 तोडसा आश्रमशाला में छात्राओं से संवाद

दौरे के दौरान जिलाधिकारी पंडा ने तोडसा शासकीय आश्रमशाला का निरीक्षण किया और नई इमारत के निर्माण कार्य की जानकारी ली। उन्होंने छात्राओं से संवाद करते हुए उनकी पढ़ाई और स्कूल में उपलब्ध सुविधाओं के बारे में चर्चा की।

इसके बाद उन्होंने तोडसा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का भी निरीक्षण किया और दुर्गम क्षेत्र के नागरिकों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली।

 नागुलवाही सड़क की गुणवत्ता परखी

जिलाधिकारी ने नागुलवाही सड़क निर्माण कार्य का भी प्रत्यक्ष निरीक्षण किया। उन्होंने सड़क की वर्तमान स्थिति और निर्माण की प्रगति की जानकारी संबंधित अधिकारियों से ली तथा काम की गुणवत्ता की जांच की।

 आने वाले महीनों में शुरू होंगे सभी 45 पालना घर

पैमा में शुरू किया गया पालना घर इस अभियान का पहला समुदाय आधारित पालना घर है। प्रशासन के अनुसार जिले में प्रस्तावित सभी 45 पालना घर आने वाले कुछ महीनों में चरणबद्ध तरीके से शुरू किए जाएंगे।

यह पहल दुर्गम गडचिरोली के बच्चों के लिए पोषण, स्वास्थ्य और सुरक्षित बचपन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

रिपोर्टर : चंद्रशेखर पुलगम

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