झिंगाणूर में पानी के लिए आर-पार की लड़ाई

गडचिरोली : दशकों से प्यासे झिंगाणूर क्षेत्र के ग्रामीणों का सब्र अब टूटने लगा है। शासन-प्रशासन और आजी-माजी जनप्रतिनिधियों को बार-बार समस्या बताने के बावजूद पेयजल संकट का स्थायी समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश है। अब ग्रामीणों ने पानी के सवाल पर आर-पार की लड़ाई का संकेत दिया है।

झिंगाणूर सहित आसपास के 10 से 11 गांवों के ग्रामीणों ने अहेरी विधानसभा प्रमुख एवं शिवसेना नेता संदीप कोरेत से मुलाकात कर अपनी गंभीर समस्या रखी। ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि वर्षों से आश्वासन मिल रहे हैं, लेकिन पानी की समस्या जस की तस बनी हुई है। अब उन्हें स्थायी समाधान चाहिए, सिर्फ आश्वासन नहीं।

800 फीट तक खोदी बोरवेल, फिर भी पानी गायब!

झिंगाणूर माल, झिंगाणूर चेक नंबर-1, झिंगाणूर चेक नंबर-2, कोर्ला माल, कोर्ला चेक, किष्टय्यापल्ली, रमेशगुडम, झिंगाणूर-वडदेली, येडसिली और मंगीगुडम सहित अनेक गांवों में पानी की स्थिति बेहद गंभीर है।

डोंगर-दर्रों से घिरे इस क्षेत्र में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। कई स्थानों पर 700 से 800 फीट तक बोरवेल खोदने के बावजूद पानी नहीं मिल रहा है। ऐसे में ग्रामीणों के सामने पीने के पानी के साथ-साथ खेती का भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

“इंद्रावती से पानी लाओ, तभी बुझेगी प्यास!”

ग्रामीणों ने कहा कि झिंगाणूर क्षेत्र से करीब 8 किलोमीटर दूर बारहमासी बहने वाली इंद्रावती नदी मौजूद है। ऐसे में नदी से जलापूर्ति योजना शुरू करना ही इस क्षेत्र के लिए सबसे प्रभावी और स्थायी विकल्प हो सकता है।

ग्रामीणों की मांग है कि इंद्रावती नदी से पाइपलाइन/जलसिंचन योजना के माध्यम से गांवों तक पानी पहुंचाया जाए। इससे हजारों ग्रामीणों को पेयजल मिलेगा और हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि को भी सिंचाई का लाभ मिल सकता है।

कोरेत ने दिया आंदोलन का इशारा

ग्रामीणों की पीड़ा सुनने के बाद संदीप कोरेत ने कहा कि जब तक झिंगाणूर क्षेत्र की पानी की समस्या स्थायी रूप से हल नहीं होती, तब तक शासन और प्रशासन के समक्ष लगातार आवाज उठाई जाएगी।

उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि जरूरत पड़ी तो बड़े आंदोलन के माध्यम से सरकार को इस गंभीर समस्या पर ध्यान देने के लिए मजबूर किया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में पानी के साथ-साथ मोबाइल नेटवर्क, टावर, सड़क और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं की समस्याओं को भी शासन के सामने रखकर समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा।

ग्रामीणों का सवाल—आखिर कब तक प्यासा रहेगा झिंगाणूर?

ग्रामीणों का कहना है कि जब क्षेत्र के आसपास बारहमासी इंद्रावती नदी बह रही है, तो गांवों को सालभर पानी के लिए तरसना क्यों पड़ रहा है? आखिर प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस समस्या का स्थायी समाधान कब करेंगे?

अब ग्रामीणों की निगाहें शासन-प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। दशकों से लंबित यह पानी का संकट अब सिर्फ एक गांव का मुद्दा नहीं, बल्कि 10 से 11 गांवों के हजारों लोगों के अस्तित्व और भविष्य का सवाल बन चुका है।

इस दौरान भूमजा सिरियाजी मड़ावी, समाजसेवक रामचंद्र कुमरी, कोर्ला के पूर्व सरपंच मनोहर चेड़े, दासू मड़ावी, पेंटा कुड़मेथे, पोचम मड़ावी, इरपा सिडाम, चिंतामण मड़ावी, किष्टय्यापल्ली के रामचंद्र दुर्गम सहित महिला एवं पुरुष बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

रिपोर्टर : चंद्रशेखर पुलगम

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