बनावटी ग्राहक बनकर अधिकारियों ने बिछाया जाल,वन्यजीव तस्करों का खेल उजागर
गडचिरोली : वन्यजीवों के अंगों की खरीदारी करने वाले ग्राहक बनकर अधिकारियों ने तस्करों से संपर्क साधा और फिर उन्हें सुनियोजित जाल में फंसा लिया। आलापल्ली वनविभाग के झिमेला उपक्षेत्र अंतर्गत आलापल्ली–सिरोंचा राष्ट्रीय महामार्ग पर नागमाता मंदिर परिसर में की गई संयुक्त कार्रवाई में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
आरोपियों के कब्जे से एक जिंदा भारतीय पैंगोलिन, उसका जिंदा बच्चा, बाघ के अंग होने के संदेह वाली 43 हड्डियां तथा दो दांत बरामद किए गए हैं। बरामद हड्डियां और दांत वास्तव में किस वन्यजीव के हैं, इसकी पुष्टि वैज्ञानिक जांच के बाद होगी।
चार एजेंसियों ने मिलकर बिछाया जाल
वन्यजीवों की अवैध खरीद-फरोख्त की गुप्त सूचना मिलने के बाद आलापल्ली वनविभाग, राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI), वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) तथा उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व, छत्तीसगढ़ की टीमों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की योजना बनाई।
तस्करों को किसी तरह का शक न हो, इसलिए अधिकारियों ने खुद को वन्यजीव और उनके अंग खरीदने वाले ग्राहक के रूप में पेश किया। बातचीत के बाद आरोपियों को आलापल्ली–सिरोंचा राष्ट्रीय महामार्ग स्थित नागमाता मंदिर परिसर में कथित सौदे के लिए बुलाया गया।
रात साढ़े नौ बजे तस्करों को घेरा
योजना के मुताबिक 26 सितंबर की रात करीब साढ़े नौ बजे पांच संदिग्ध वन्यजीवों की कथित अवैध खरीद-फरोख्त के लिए मौके पर पहुंचे। पहले से घात लगाए संयुक्त दल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पांचों को हिरासत में ले लिया।
इसके बाद पूछताछ और जांच में मिली जानकारी के आधार पर एक अन्य संबंधित व्यक्ति को भी हिरासत में लिया गया। इस तरह मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या छह हो गई।
जिंदा पैंगोलिन और बच्चे को बचाया
आरोपियों के पास मौजूद सामान की तलाशी के दौरान एक जिंदा वयस्क भारतीय पैंगोलिन और उसका बच्चा बरामद हुआ। भारतीय पैंगोलिन को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-1 में शामिल किया गया है और उसे उच्च स्तर का कानूनी संरक्षण प्राप्त है।
इसके अलावा बाघ के अंग होने के संदेह वाली 43 हड्डियां और दो दांत भी जब्त किए गए हैं। इनका वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाएगा, जिसके बाद यह स्पष्ट होगा कि ये अवशेष वास्तव में किस वन्यजीव के हैं।
सभी छह आरोपी 1 अक्टूबर तक वन हिरासत में
गिरफ्तार आरोपियों को रविवार को अहेरी स्थित प्रथम श्रेणी न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय ने सभी छह आरोपियों को 27 सितंबर से 1 अक्टूबर 2026 तक वन हिरासत में भेज दिया है।
तस्करी के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश
वन विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि बरामद वन्यजीवों और संदिग्ध अवयवों का स्रोत क्या है, इनका सौदा किसके साथ होने वाला था और इस पूरे नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं।
यदि वैज्ञानिक जांच में हड्डियां और दांत बाघ के होने की पुष्टि होती है, तो जांच इस दिशा में भी आगे बढ़ेगी कि बाघ की कथित शिकार की घटना कहां हुई, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और उसके अंग आरोपियों तक किस माध्यम से पहुंचे।
वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में जांच
मामले की आगे की जांच आलापल्ली के उपवनसंरक्षक शैलेश मीना तथा उपविभागीय वनाधिकारी एस. जी. पवार के मार्गदर्शन में आलापल्ली वनपरिक्षेत्र अधिकारी एस. आर. रामगुंडेवार कर रहे हैं।
कार्रवाई में वनपरिक्षेत्र के क्षेत्र सहायकों, वनरक्षकों, वनसेवकों सहित अन्य वनकर्मियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की गई है।
अब सवाल—कौन है इस नेटवर्क का असली सूत्रधार?
बनावटी ग्राहकों के जरिए रचा गया यह सापळा सफल होने के बाद वन्यजीव तस्करी के बड़े नेटवर्क पर शिकंजा कसने की उम्मीद बढ़ गई है। गिरफ्तार आरोपी केवल वाहक हैं या पूरे नेटवर्क के मुख्य सूत्रधारों तक पहुंचने वाली महत्वपूर्ण कड़ी, यह जांच के बाद स्पष्ट होगा। साथ ही अन्य राज्यों में सक्रिय तस्करों से उनके कथित संबंध हैं या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।
वन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वन्यजीवों की शिकार, अवैध खरीद-फरोख्त अथवा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल वन विभाग को दें।
रिपोर्टर : चंद्रशेखर पुलगम

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