अहेरी नगर पंचायत के घनकचरा प्रबंधन में करीब 2 करोड़ के कथित भ्रष्टाचार का आरोप
गड़चिरोली : गड़चिरोली जिले की अहेरी नगर पंचायत में दलितोत्तर वस्ती सुधार योजना (2024-25) के तहत संचालित घनकचरा संकलन, परिवहन एवं वर्गीकरण (SWM) कार्य में करीब 1 करोड़ 97 लाख रुपये के कथित भ्रष्टाचार का मामला सामने आने का दावा किया गया है। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष डॉ. अजयभाऊ कंकडालवार ने इस मामले में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए राज्य के अपर मुख्य सचिव (नगर विकास), विभागीय आयुक्त तथा गड़चिरोली जिलाधिकारी को लिखित शिकायत दी है।
कंकडालवार ने शिकायत में संबंधित ठेकेदार दीपक उत्तराधी तथा जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कर दोष सिद्ध होने पर आपराधिक मामला दर्ज करने और ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की है।
1.97 करोड़ रुपये के काम पर सवाल
शिकायत के अनुसार, अहेरी नगर पंचायत ने घनकचरा व्यवस्थापन का काम 2 मई 2025 को ठेकेदार दीपक उत्तराधी को दिया था। इस कार्य की अनुमानित लागत 1,97,95,922 रुपये बताई गई है। कंकडालवार का आरोप है कि काम शुरू होने के बाद से ही निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया और माप पुस्तिका (MB), मजदूरों की उपस्थिति, वेतन, EPF-ESIC तथा सुरक्षा सामग्री से संबंधित रिकॉर्ड में अनियमितताएं की गईं।
MB में 30 दिन की हाजिरी दिखाने का आरोप
कंकडालवार के अनुसार, 20 जून 2025 को प्रस्तुत किए गए पहले बिल में सभी मजदूरों को लगातार 30 दिनों तक उपस्थित बताया गया। उनका दावा है कि वास्तव में मजदूरों ने पूरे 30 दिन काम नहीं किया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि नगर अभियंता द्वारा स्थल निरीक्षण किए बिना MB में दर्ज जानकारी को प्रमाणित कर करीब 13 लाख रुपये का बिल पास किया गया।
मजदूरों को 26 दिन का वेतन, भुगतान 30 दिन का होने का दावा
शिकायत में सफाई कर्मचारियों के वेतन को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कंकडालवार का कहना है कि उपस्थिति रजिस्टर में मजदूरों को 30 दिन उपस्थित दिखाकर नगर पंचायत से पूरा भुगतान लिया जाता है, जबकि मजदूरों को कथित तौर पर केवल 26 दिनों का वेतन दिया जाता है। शेष चार दिनों के वेतन को लेकर उन्होंने जांच की मांग की है।
EPF-ESIC राशि को लेकर भी जांच की मांग
कंकडालवार ने EPF और ESIC भुगतान में भी कथित अनियमितता का आरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार, प्रत्येक कर्मचारी के लिए EPF के नाम पर 2,102 रुपये तथा ESIC के लिए 502 रुपये की राशि का प्रावधान है। आरोप है कि संबंधित राशि मजदूरों के खातों में जमा नहीं की जा रही और उन्हें ECR रसीदें भी उपलब्ध नहीं कराई जातीं। उन्होंने इस पूरे मामले की बैंक रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर जांच कराने की मांग की है।
सुरक्षा सामग्री और डीजल खर्च पर भी सवाल
सफाई कर्मचारियों के लिए गमबूट, मास्क और जैकेट जैसी सुरक्षा सामग्री के लिए सालाना करीब 3 लाख रुपये का प्रावधान होने का दावा करते हुए कंकडालवार ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों को अपेक्षित सुरक्षा सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके अलावा वाहनों के लिए प्रतिदिन 31.5 लीटर डीजल का खर्च दर्शाए जाने तथा डीजल की रसीदों में कथित अनियमितता की भी जांच की मांग की गई है।
कंकडालवार की पांच प्रमुख मांगें
कंकडालवार ने प्रशासन के समक्ष मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पांच प्रमुख मांगें रखी हैं—
1. घनकचरा व्यवस्थापन के पूरे काम का स्वतंत्र जिला स्तरीय समिति से विशेष ऑडिट कराया जाए।
2. ठेकेदार एवं मजदूरों के बैंक खातों के साथ EPF-ESIC भुगतान की जांच की जाए।
3. आरोपों की जांच कर दोष सिद्ध होने पर ठेकेदार दीपक उत्तराधी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर ब्लैकलिस्ट किया जाए।
4. कथित गलत MB प्रमाणित करने वाले नगर अभियंता एवं संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कर शिस्तभंग कार्रवाई की जाए।
5. मजदूरों के कथित बकाया चार दिनों के वेतन तथा EPF-ESIC की राशि की जांच कर पात्र कर्मचारियों के खातों में जमा कराई जाए।
सात दिन में जांच नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
डॉ. अजय कंकडालवार ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर निष्पक्ष जांच शुरू नहीं की गई, तो सफाई कर्मचारियों को साथ लेकर अहेरी नगर पंचायत के सामने धरना आंदोलन किया जाएगा।
इन आरोपों के बाद अहेरी नगर पंचायत के घनकचरा व्यवस्थापन कार्य को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। अब शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच के बाद वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है और प्रशासन संबंधित अधिकारियों व ठेकेदार के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है, इस पर सबकी नजर है।
रिपोर्टर : संजय यमसलवार

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