पाचखेड़े के बाद लहाड़े प्रकरण; संतोष मद्दीवार का आक्रामक फॉलोअप चर्चा में
गड़चिरोली - जिले के अहेरी विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों, स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासन से जुड़े कथित अनियमितताओं के मुद्दों को लगातार उठाने वाले भाजपा के जिला उपाध्यक्ष संतोष मद्दीवार इन दिनों चर्चा के केंद्र में हैं। जिला नियोजन अधिकारी श्रीराम पाचखेड़े की कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवालों से लेकर जिला शल्यचिकित्सक डॉ. वर्षा लहाड़े के खिलाफ की गई शिकायतों तक, विभिन्न मामलों में वरिष्ठ अधिकारियों और प्रशासनिक स्तर पर16 लगातार फॉलोअप किए जाने की बात सामने आई है। इसी पृष्ठभूमि में समर्थकों द्वारा संतोष मद्दीवार को ‘जायंट किलर’ की उपमा दी जा रही है। हालांकि, संबंधित मामलों में अंतिम निष्कर्ष और प्रशासनिक कार्रवाई का आधार आधिकारिक जांच एवं अभिलेख ही होंगे।
पाचखेड़े प्रकरण में शिकायतों के बाद तबादला
जिला नियोजन अधिकारी के पद पर कार्यरत रहते हुए श्रीराम पाचखेड़े की कार्यप्रणाली को लेकर विभिन्न शिकायतें सामने आई थीं। विकास कार्यों की मंजूरी से जुड़े कुछ मामलों में ठेकेदारों की ओर से गंभीर आरोप लगाए जाने और जिलाधिकारी के समक्ष दस्तावेजों के साथ शिकायत किए जाने की खबरें सामने आई थीं। इसके बाद पाचखेड़े का तबादला हुआ और जनवरी 2026 में प्रसाद घाडगे ने जिला नियोजन अधिकारी के रूप में पदभार संभाला अहेरी तहसील के विभिन्न विकास कार्यों को लेकर भी संतोष मद्दीवार द्वारा प्रशासन के समक्ष लगातार मुद्दे उठाए जाने का दावा किया गया है। स्थानीय स्तर पर अधिकारियों से मुलाकात करने के साथ ही आवश्यक कार्रवाई के लिए वरिष्ठ अधिकारियों तक विषय पहुंचाने की भूमिका उन्होंने निभाई, ऐसा उनके समर्थकों का कहना है।
स्वास्थ्य व्यवस्था के मुद्दे पर विधानभवन तक पहुंचा मामला
इसके बाद अहेरी स्थित शासकीय महिला एवं बाल अस्पताल सहित जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर भी संतोष मद्दीवार की सक्रियता सामने आई। अहेरी में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी समस्याओं, चिकित्सकों के इस्तीफे और रिक्त पदों के मुद्दे को लेकर मद्दीवार सहित कुछ स्थानीय पदाधिकारियों ने विधानभवन में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर से मुलाकात की थी। संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग किए जाने की खबरें भीi सामने आई थीं। इन शिकायतों की पृष्ठभूमि में जांच समिति गठित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। शिकायतकर्ताओं की ओर से यह दावा भी किया गया था कि जिला शल्यचिकित्सक की कार्यप्रणाली के कारण अहेरी के कुछ चिकित्सकों ने इस्तीफा दिया। हालांकि, इन दावों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही सामने आएगा।
डॉ. लहाड़े निलंबित, विभागीय जांच के आदेश
इस पूरे घटनाक्रम में 16 सितंबर 2026 को महाराष्ट्र शासन के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला शल्यचिकित्सक डॉ. वर्षा शिवाजी लहाड़े को निलंबित किए जाने और विभागीय जांच के आदेश दिए जाने की खबर सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, निलंबन आदेश में उनके कार्यकाल के दौरान कर्तव्य निर्वहन में गंभीर लापरवाही का उल्लेख किया गया है। विभागीय जांच के दौरान संबंधित मामलों और आरोपों की आधिकारिक स्तर पर पड़ताल की जाएगी। डॉ. लहाड़े के खिलाफ हुई इस कार्रवाई के बाद अहेरी तथा गड़चिरोली जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार आवाज उठाने वाले स्थानीय पदाधिकारियों की भूमिका एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
‘सिर्फ शिकायत नहीं, बल्कि लगातार फॉलोअप’
संतोष मद्दीवार के समर्थकों के अनुसार, उनकी कार्यशैली केवल शिकायत दर्ज कराने तक सीमित नहीं रहती। किसी मुद्दे को प्रशासन के सामने रखने के बाद संबंधित अधिकारियों से मुलाकात, दस्तावेज प्रस्तुत करना और आवश्यकता पड़ने पर वरिष्ठ स्तर तक उसका फॉलोअप करना उनकी कार्यपद्धति का हिस्सा है। पाचखेड़े प्रकरण में जिला नियोजन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठे और बाद में उनका तबादला हुआ। वहीं लहाड़े प्रकरण में शिकायतों और जांच की मांग के बाद अब निलंबन एवं विभागीय जांच की कार्रवाई सामने आई है। इन दोनों घटनाक्रमों में संतोष मद्दीवार द्वारा शिकायतों और वरिष्ठ स्तर पर फॉलोअप किए जाने का दावा उनके समर्थकों की ओर से किया जा रहा है। इसी कारण अहेरी के राजनीतिक गलियारों में उनकी सक्रियता को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
‘आवाज कम, असर ज्यादा’ की कार्यशैली?
अहेरी क्षेत्र के स्थानीय मुद्दों को प्रशासन के वरिष्ठ स्तर तक पहुंचाने और उनके समाधान के लिए लगातार पैरवी करने की शैली को लेकर संतोष मद्दीवार चर्चा में हैं। समर्थकों की ओर से उनकी कार्यशैली को “आवाज कम, असर ज्यादा” बताया जा रहा है। अब विकास कार्यों और स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े आगामी मुद्दों पर मद्दीवार की भूमिका क्या रहती है और उनके फॉलोअप का प्रशासनिक स्तर पर क्या असर होता है, इस पर अहेरी के राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र की नजर बनी हुई है।
रिपोर्टर - संजय यमसलवार
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