819 माओवादी छोड़ चुके हैं हिंसा का रास्ता, सरकार ने रोजगार, शिक्षा और स्वावलंबन के लिए बढ़ाया हाथ

गडचिरोली : महाराष्ट्र के मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल और राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सदानंद दाते ने रविवार को गडचिरोली जिले के नवजीवन वसाहत, नवेगांव में आत्मसमर्पित माओवादी सदस्यों से सीधे संवाद कर उनके पुनर्वास, रोजगार और मुख्यधारा में समावेश के प्रयासों की समीक्षा की। इस अवसर पर आत्मसमर्पित माओवादियों को पुनर्वास निधि के चेक, विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभ तथा स्वरोजगार से जुड़ी सामग्री वितरित की गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार आत्मसमर्पित युवाओं को समाज की मुख्यधारा में शामिल कर उनके सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि स्वावलंबी जीवन के लिए आवश्यक हर संभव सहायता सरकार उपलब्ध कराएगी।

गडचिरोली में कमजोर पड़ा नक्सलवाद
कार्यक्रम में बताया गया कि वर्ष 2005 से लागू आत्मसमर्पण नीति और पुलिस-प्रशासन के सतत प्रयासों के कारण गडचिरोली में नक्सलवाद अब लगभग समाप्ति की ओर है। हिंसा और जंगल के जीवन से तंग आकर अनेक वरिष्ठ एवं सक्रिय माओवादी संगठन छोड़ चुके हैं। अब तक 819 माओवादी गडचिरोली पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जिनका पुनर्वास कर उन्हें सामान्य जीवन से जोड़ा गया है।
पुनर्वास योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक
मुख्य सचिव और डीजीपी की मौजूदगी में आत्मसमर्पित माओवादी सदस्यों को केंद्र और राज्य सरकार की पुनर्वास योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता के चेक वितरित किए गए। इसके अलावा महिला बचत समूहों की सदस्यों को सिलाई मशीनें, पुरुष लाभार्थियों को स्प्रे पंप, ई-श्रम कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड तथा वाहन चालक लाइसेंस प्रदान किए गए।
एक विशेष अवसर पर आत्मसमर्पित माओवादी अशोक मासा होली और उनके परिवार को भी सम्मानित किया गया। सफल चिकित्सकीय प्रक्रिया के बाद उन्हें संतान प्राप्त होने पर अतिथियों ने परिवार को घरेलू उपयोग की वस्तुएं भेंट कर शुभकामनाएं दीं।
रोजगार, शिक्षा और कृषि से जोड़ा जा रहा है आत्मसमर्पितों को
राजेश अग्रवाल ने कहा कि गडचिरोली पुलिस द्वारा चलाए जा रहे पुनर्वास कार्यक्रमों के माध्यम से आत्मसमर्पितों को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और स्वरोजगार से संबंधित सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने लाभार्थियों से इन योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाकर सम्मानपूर्वक जीवन जीने का आह्वान किया।
वहीं डीजीपी सदानंद दाते ने हिंसा का मार्ग छोड़कर शांति, विकास और प्रगति का रास्ता अपनाने वाले आत्मसमर्पित माओवादियों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
बच्चों के राष्ट्रगान के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम का भावनात्मक समापन आत्मसमर्पित माओवादी परिवारों के बच्चों द्वारा राष्ट्रगान प्रस्तुत कर किया गया। इस दौरान आत्मसमर्पित परिवारों ने वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष अपने अनुभव साझा किए और सरकार द्वारा मिले सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
ये अधिकारी रहे उपस्थित
कार्यक्रम में राज्य गुप्तवार्ता विभाग के आयुक्त शिरीष जैन, विशेष अभियान के अपर पुलिस महानिदेशक डॉ. छेरिंग दोरजे, नागपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक संदीप पाटिल, आदिवासी विकास आयुक्त लीना बनसोड, गडचिरोली परिक्षेत्र के डीआईजी योगेशकुमार गुप्ता, गडचिरोली के जिलाधिकारी अविश्यांत पांडा, गोंदिया के जिलाधिकारी डॉ. मंगेश गोंदावले, गडचिरोली के पुलिस अधीक्षक एम. रमेश सहित अनेक वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी उपस्थित थे।


रिपोर्टर : चंद्रशेखर 

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.