लौह परियोजनाओं से खनिज लूट और पर्यावरण का क्षरण; मनसे ने दी तीव्र आंदोलन की चेतावनी
गडचिरोली - नक्सल प्रभावित और पिछड़े माने जाने वाले गडचिरोली जिले में विकास के नाम पर संचालित लौह परियोजनाओं द्वारा शासन को गुमराह किए जाने, खनिज रॉयल्टी की चोरी तथा बड़े पैमाने पर पर्यावरण विनाश किए जाने का गंभीर आरोप महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने लगाया है। इस संबंध में मनसे की जिला उपाध्यक्ष सोनल वाकुलकर ने अपर जिलाधिकारी कार्यालय, अहेरी को ज्ञापन सौंपकर प्रशासन की कड़ी आलोचना की। ज्ञापन में कहा गया है कि संबंधित प्रशासनिक अधिकारी इन गंभीर मामलों की जानबूझकर अनदेखी कर रहे हैं, जिससे देश को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। लौह परियोजनाओं की भारी वाहनों की आवाजाही से उड़ने वाली धूल के कारण आसपास की कृषि भूमि में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। मनसे ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल पंचनामा कर किसानों को उचित मुआवजा प्रदान करे।
इसके साथ ही, कंपनी के वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं में मृत्यु होने पर मृतक के वारिसों को 10 लाख रुपये तथा स्थायी अपंगता की स्थिति में 5 लाख रुपये की सहायता देने की नियमावली लागू करने की भी मांग की गई है। पर्यावरण के मुद्दे पर सोनल वाकुलकर ने कहा कि कंपनियों द्वारा की जा रही अंधाधुंध वृक्ष कटाई को तुरंत रोका जाए और कड़े नियमों के तहत वृक्षारोपण कराया जाए।
स्थानीय रोजगार को लेकर मनसे ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है। संगठन का आरोप है कि वर्षों से बेरोजगारी से जूझ रहे गडचिरोली के स्थानीय युवाओं की अनदेखी कर कंपनियों में बाहरी लोगों को रोजगार दिया जा रहा है। मनसे ने स्पष्ट मांग की है कि कंपनियों में कम से कम 80 प्रतिशत नौकरियां स्थानीय मराठी श्रमिकों को दी जाएं। मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे के आदेश पर तथा नेता राजू उंबरकर के नेतृत्व में चेतावनी दी गई है कि यदि इन मांगों को शीघ्र पूरा नहीं किया गया तो जिले में तीव्र आंदोलन छेड़ा जाएगा। आंदोलन के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी कानून-व्यवस्था की स्थिति के लिए प्रशासन पूरी तरह जिम्मेदार होगा। इस ज्ञापन की प्रतियां मुख्यमंत्री तथा संबंधित मंत्रियों को भी भेजी गई हैं।
रिपोर्टर - चंद्रशेखर पुलगम


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