गडचिरोली में खेती को ड्रोन का सहारा; जिला परिषद की पहल से हाईटेक कृषि को बढ़ावा
गडचिरोली - जिले में खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए जिला परिषद के कृषि विभाग ने ‘कृषि ड्रोन’ के माध्यम से खाद और कीटनाशकों के छिड़काव का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस अभिनव पहल का उद्देश्य दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के किसानों तक तकनीक पहुंचाकर खेती को अधिक सुरक्षित,सटीक और लाभकारी बनाना है। यह परियोजना मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुहास गाडे के मार्गदर्शन में लागू की जा रही है।
आधुनिक तकनीक से खेती को नई दिशा
पारंपरिक छिड़काव पद्धतियों में जहां पानी और दवाइयों की भारी बर्बादी होती है,वहीं ड्रोन तकनीक के जरिए यह कार्य बेहद सटीक तरीके से किया जा सकता है। कृषि विभाग के अनुसार,इस तकनीक से करीब 90% तक पानी की बचत और 25% तक दवाइयों की बचत संभव है। इससे न केवल लागत घटेगी,बल्कि फसल पर दवाओं का असर भी अधिक प्रभावी होगा।
उपक्रम की प्रमुख विशेषताएं किसान समूहों को प्राथमिकता: किसान उत्पादक कंपनियों (FPOs) और महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन खरीद के लिए अनुदान और तकनीकी सहायता ड्रोन पायलट प्रशिक्षण: स्थानीय युवाओं और महिलाओं को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण देकर रोजगार के अवसर मुख्य फसलों पर फोकस: धान की फसल में ‘तुडतुडा’ जैसे कीटों पर प्रभावी नियंत्रण दूरस्थ क्षेत्रों में सेवा: जहां खेतों तक पहुंचना कठिन है, वहां ‘मोबाइल ड्रोन सेवा’ किसानों के खेत तक पहुंचेगी
किसानों को होने वाले फायदे
मजदूरों की कमी की समस्या का समाधान
कम समय और कम लागत में बड़े क्षेत्र में छिड़काव
जहरीले रसायनों के संपर्क से किसानों की सुरक्षा
फसल उत्पादन में वृद्धि की संभावना
अधिकारियों का मत
मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुहास गाडे ने कहा कि, “ड्रोन आधारित यह पहल गडचिरोली जिले में हाईटेक खेती को बढ़ावा देगी। इससे खेती अधिक आधुनिक, सुरक्षित और प्रभावी बनेगी, साथ ही महिला समूहों के लिए रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे।” वहीं, कृषि विकास अधिकारी किरण खोमणे ने जानकारी दी कि वर्ष 2024-25 में जिले की दो महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन खरीद के लिए अनुदान दिया गया है और उन्हें ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया है।गडचिरोली जैसे दुर्गम जिले में ड्रोन तकनीक का उपयोग खेती में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मददगार होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी सशक्तिकरण और रोजगार सृजन का भी मजबूत माध्यम बनेगी।
रिपोर्टर - चंद्रशेखर पुलगम

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