पुस्तोला क्लस्टर में एकात्मिक खेती परियोजना को 4.47 करोड़ की मंजूरी

गडचिरोली - (जिमाका): महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन में आदिवासी क्षेत्रों के शाश्वत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। गडचिरोली जिले के धानोरा तालुका स्थित पुस्तोला क्लस्टर में एकात्मिक बाड़ी आधारित खेती पद्धति परियोजना को राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा मंजूरी प्रदान की गई है। इस परियोजना से क्षेत्र के आदिवासी परिवारों की आजीविका मजबूत होने के साथ-साथ खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने में मदद मिलेगी। नाबार्ड के ट्राइबल डेवलपमेंट फंड के अंतर्गत संचालित इस परियोजना का क्रियान्वयन वॉटरशेड ऑर्गनायज़ेशन ट्रस्ट (WOTR) के माध्यम से किया जाएगा। परियोजना में पुस्तोला क्लस्टर के 15 गांवों के कुल 491 आदिवासी परिवारों को शामिल किया गया है।

परियोजना की कुल लागत 447.86 लाख रुपये निर्धारित की गई है, जिसमें से 337.60 लाख रुपये नाबार्ड द्वारा अनुदान के रूप में दिए जाएंगे। इसके अलावा अन्य स्रोतों से 35.28 लाख रुपये तथा लाभार्थियों द्वारा 74.98 लाख रुपये का योगदान किया जाएगा।

गोटा क्लस्टर के सफल मॉडल से प्रेरणा

उल्लेखनीय है कि इससे पहले धानोरा तालुका के ही गोटा क्लस्टर में भी 15 गांवों में इसी प्रकार की एकात्मिक खेती परियोजना सफलतापूर्वक संचालित की जा रही है। इस परियोजना के लिए 4.35 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, जिसमें नाबार्ड द्वारा 3.28 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया। गोटा क्लस्टर के सकारात्मक परिणामों के आधार पर पुस्तोला क्लस्टर में इस नई परियोजना को गति मिलने की उम्मीद है। इस परियोजना के तहत कृषि, पशुपालन, जल संरक्षण, आयवृद्धि और पर्यावरण अनुकूल खेती पद्धतियों को एकीकृत रूप से लागू किया जाएगा। बदलते जलवायु परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए किसानों को शाश्वत खेती के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
राज्य सरकार का मानना है कि इस पहल से गडचिरोली जिले के दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में आर्थिक स्थिरता, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और भौतिक एवं वित्तीय प्रगति के

अनुसार अनुदान वितरित किया जाएगा।

स्थानीय स्तर पर रोजगार और उत्पादन में वृद्धि की उम्मीद परियोजना के सफल क्रियान्वयन से न केवल कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। इससे आदिवासी परिवारों के जीवन स्तर में सुधार आने की उम्मीद जताई जा रही है।

रिपोर्टर - चंद्रशेखर पुलगम 

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