आलापल्ली वनपरिक्षेत्र में करोड़ों के विकास कार्यों पर सवाल; भ्रष्टाचार के आरोपों से मचा हड़कंप

गड़चिरोली - जिले के आलापल्ली वनपरिक्षेत्र में जिला वार्षिक योजना (DPDC) आदिवासी उपयोजना (ISP) तथा अन्य योजनाओं के अंतर्गत कराए गए विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितता,घटिया निर्माण और अपूर्ण कार्यों के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इस मामले ने क्षेत्र में हलचल पैदा कर दी है। प्रकरण को लेकर अखिल भारतीय भ्रष्टाचार निर्मूलन संघर्ष समिति ने सीधे जिलाधिकारी तथा मुख्य वनसंरक्षक को शिकायत सौंपते हुए विस्तृत और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

समिति के कार्यकारी अध्यक्ष एवं गड़चिरोली जिलाध्यक्ष शंकर का. ढोलगे द्वारा प्रस्तुत निवेदन में वर्ष 2023-24 तथा 2024-25 के दौरान किए गए विभिन्न विकास कार्यों पर गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। शिकायत में कहा गया है कि कई कार्यों में वास्तविक निर्माण किए बिना ही बिलों की निकासी की गई, कुछ स्थानों पर निम्न स्तर की सामग्री का उपयोग किया गया, जबकि कई परियोजनाएं आज भी अधूरी पड़ी हैं।

जांच प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

समिति ने आरोप लगाया है कि इस मामले में जारी जांच प्रक्रिया भी निष्पक्ष और प्रभावी नहीं दिखाई दे रही है। निवेदन के अनुसार, कई स्थानों पर प्रत्यक्ष स्थल निरीक्षण किए बिना केवल कागजी औपचारिकताओं और फोटो दस्तावेजों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। शिकायतकर्ताओं के पास उपलब्ध महत्वपूर्ण प्रमाणों को भी जांच में समुचित महत्व नहीं दिए जाने की बात कही गई है।

ठेकेदार के हस्तक्षेप का आरोप

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि जांच प्रक्रिया के दौरान संबंधित ठेकेदार का बिना किसी अधिकृत अनुमति के हस्तक्षेप हो रहा है। समिति का कहना है कि इससे जांच की निष्पक्षता प्रभावित होने की आशंका है। साथ ही जांच समिति में तकनीकी विशेषज्ञों की अनुपस्थिति के कारण कार्यों की गुणवत्ता और तकनीकी पहलुओं का गहराई से परीक्षण नहीं हो पा रहा है।

दोषियों को बचाने की आशंका

इन परिस्थितियों के चलते समिति ने आशंका व्यक्त की है कि संबंधित अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। समिति का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह शासन के वित्तीय नियमों,पारदर्शिता और जवाबदेही की मूल भावना के विपरीत होगा।

समिति की प्रमुख मांगें

शिकायतकर्ताओं की उपस्थिति में संबंधित स्थलों का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया जाए। तकनीकी विशेषज्ञों की समिति गठित कर भौतिक एवं तकनीकी ऑडिट कराया जाए। जांच प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के अनधिकृत हस्तक्षेप पर तत्काल कार्रवाई की जाए। दोषी अधिकारी,कर्मचारी तथा संबंधित पक्षों के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई की जाए। फिलहाल,इन गंभीर आरोपों के बाद आलापल्ली वनपरिक्षेत्र में हुए विकास कार्यों की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब जिले की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और आगे क्या कदम उठाता है।

रिपोर्टर - संजय यमसलवार 

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