दुर्गम रास्तों से जंग हार गई जिंदगी: छह किमी बाइक सफर के बाद भी नहीं बच सकी महिला

गडचिरोली - जिले के दूरस्थ एटापल्ली तहसील में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी एक बार फिर उजागर हुई है। विषप्राशन के बाद एक 25 वर्षीय महिला को परिजन जान जोखिम में डालकर खड्ढों भरे रास्ते से करीब छह किलोमीटर तक बाइक पर ले गए, लेकिन समय पर समुचित उपचार न मिलने के कारण उसकी मौत हो गई। इस घटना ने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था और आपात सेवाओं की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार,एटापल्ली तहसील के कांदोली गांव निवासी मीरा गणेश लेखामी ने पारिवारिक कारणों के चलते विषप्राशन कर लिया। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन उसे तुरंत अस्पताल ले जाने के लिए निकले, लेकिन गांव में एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। मजबूरन परिजनों ने महिला को बाइक पर लिटाकर बुर्गी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की ओर रवाना किया।

खराब रास्ता बना बड़ी बाधा

कच्चे और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से गुजरते हुए परिजनों ने तेजी से सफर तय किया। रास्ते की दुर्दशा के बावजूद उन्होंने महिला को समय पर उपचार दिलाने की पूरी कोशिश की। इस बीच एक स्थानीय युवक ने फोन पर स्वास्थ्य केंद्र को पहले ही सूचना देकर डॉक्टरों को सतर्क कर दिया था।

उपकरण खराब, इलाज में देरी

बुर्गी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने पर एक और बड़ी समस्या सामने आई। यहां उपचार के लिए जरूरी सक्शन मशीन की नली खराब थी, जिसके कारण तत्काल विष निकालने की प्रक्रिया नहीं हो सकी। हालात गंभीर देखते हुए महिला को तुरंत एटापल्ली ग्रामीण अस्पताल रेफर किया गया। स्थिति की गंभीरता के बावजूद एंबुलेंस का चालक छुट्टी पर था। ऐसे में एक स्थानीय युवक ने जिम्मेदारी उठाते हुए खुद एंबुलेंस चलाकर मरीज को अस्पताल पहुंचाया। करीब 25 मिनट में महिला को एटापल्ली अस्पताल लाया गया।

डॉक्टरों के प्रयास भी नाकाम

अस्पताल में डॉक्टरों ने करीब आधे घंटे तक महिला को बचाने की कोशिश की। ऑक्सीजन और अन्य उपचार दिए गए, लेकिन आखिरकार महिला ने दम तोड़ दिया। व्यवस्था पर उठे सवाल इस दर्दनाक घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं दुर्गम क्षेत्रों में समय पर एंबुलेंस क्यों उपलब्ध नहीं होती? प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक उपकरण क्यों खराब पड़े हैं?
क्या आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त व्यवस्था है? स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाए। यह घटना केवल एक महिला की मौत नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों का आईना है। यदि समय पर संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध होतीं, तो शायद एक जिंदगी बचाई जा सकती थी।

रिपोर्टर - चंद्रशेखर पुलगम 

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