मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की एटापल्ली में 20 हजार धुआंरहित चूल्हों का वितरण पूरा महिला स्वास्थ्य
गड़चिरोली - मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन और विशेष पहल के तहत गड़चिरोली जिले के धानोरा एवं एटापल्ली जैसे दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में चलाए गए धुआंरहित चूल्हा वितरण अभियान को बड़ी सफलता मिली है। अब तक इन दोनों तालुकों में 20 हजार धुआंरहित चूल्हों का वितरण पूरा किया जा चुका है। यह परियोजना क्लीन मैक्स ऊर्जित एलएलपी तथा क्लाइमेटसेंस प्राइवेट लिमिटेड (फार्मर्स फॉर फॉरेस्ट समूह) के सहयोग से संचालित की जा रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह परियोजना आदिवासी परिवारों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य कर रही है। धुआंरहित चूल्हों के उपयोग से घरों में धुएं और वायु प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आई है, वहीं जलाऊ लकड़ी पर निर्भरता भी काफी घट गई है। इससे महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है और जंगलों पर पड़ने वाला दबाव कम होने से वन संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है।
स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव
परियोजना के प्रभावों का मूल्यांकन करने पर पाया गया कि 100 प्रतिशत लाभार्थी परिवारों ने घर के भीतर धुएं और वायु प्रदूषण में कमी महसूस की है। इससे महिलाओं और बच्चों में श्वसन संबंधी बीमारियों, आंखों में जलन तथा धुएं से होने वाली अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में कमी आने की संभावना बढ़ी है। स्वच्छ एवं धुआंरहित रसोई व्यवस्था ग्रामीण परिवारों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बना रही है।
महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम
इस अभियान ने महिलाओं के दैनिक जीवन को भी आसान बनाया है। लगभग 95 प्रतिशत परिवारों ने बताया कि खाना पकाने और जलाऊ लकड़ी एकत्र करने में लगने वाले समय में उल्लेखनीय बचत हुई है। पहले महिलाओं को प्रतिदिन जंगलों में जाकर लकड़ी इकट्ठा करनी पड़ती थी,लेकिन सुधारित चूल्हों के कारण ईंधन की आवश्यकता कम हो गई है। इससे महिलाओं का समय और श्रम बच रहा है, जिसे वे शिक्षा,स्वरोजगार और परिवार की अन्य आवश्यक गतिविधियों में लगा सकती हैं।
स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा
धुआंरहित चूल्हे कम ईंधन खर्च करने वाले, उपयोग में सरल और सुरक्षित हैं। इनके माध्यम से दूरदराज के क्षेत्रों में कम लागत पर स्वच्छ और टिकाऊ रसोई सुविधा उपलब्ध हो रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिल रहा है। अब तक 19,600 से अधिक परिवारों ने इन सुधारित चूल्हों को अपनाया है और ऊर्जा के अधिक प्रभावी एवं पर्यावरण-अनुकूल उपयोग की दिशा में कदम बढ़ाया है। ग्रामीण ऊर्जा उपलब्धता के क्षेत्र में यह परियोजना एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभर रही है।
वन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा में योगदान
विशेषज्ञों के अनुसार सुधारित चूल्हों के उपयोग से हर वर्ष 41 हजार टन से अधिक जलाऊ लकड़ी की बचत होने का अनुमान है। इससे जंगलों पर निर्भरता कम होगी और जैव विविधता संरक्षण के साथ प्राकृतिक संसाधनों का संवर्धन संभव होगा। इसके अलावा,इस परियोजना के कारण प्रतिवर्ष लगभग 9,200 टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आएगी। यह जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पहल से शुरू हुई यह परियोजना स्वच्छ ऊर्जा,महिला सशक्तिकरण,वन संरक्षण और जलवायु परिवर्तन नियंत्रण जैसे कई महत्वपूर्ण उद्देश्यों को एक साथ पूरा कर रही है। गड़चिरोली में मिली इस सफलता को राज्य के अन्य आदिवासी और दुर्गम जिलों के लिए भी एक प्रेरणादायी मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
रिपोर्टर - संजय यमसलवार
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