वन विभाग के शिकंजे में आए सागौन तस्कर: वन अधिकारी यों की सटीक जांच से दो आरोपी गिरफ्तार
गढ़चिरौली - सिरोंचा वन विभाग को सागौन तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता मिली है। आसरेल्ली वनपरिक्षेत्र के अंतर्गत अवैध रूप से सागौन लकड़ी की तस्करी करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। वन विभाग की लगभग 20 दिनों तक चली गुप्त जांच, तकनीकी पड़ताल और लगातार निगरानी के बाद दोनों आरोपियों को उनके गांव से दबोचा गया।वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार 29 मई 2026 की सुबह गुप्त सूचना मिली थी कि चिंतेरेवला क्षेत्र से बैलगाड़ियों के माध्यम से अवैध रूप से सागौन लकड़ी की ढुलाई की जा रही है। सूचना मिलते ही आसरेल्ली वनपरिक्षेत्र के अधिकारियों और कर्मचारियों ने तत्काल घटनास्थल की ओर दौड़ लगाई और जांच शुरू की।
बैलगाड़ी के पहियों के निशान बने सुराग
घटनास्थल पर पहुंचने के बाद वन कर्मियों ने बैलगाड़ी के पहियों के निशानों का पीछा किया। अंधेरे और जंगल के कठिन भूभाग के बावजूद टीम ने करीब से जांच की। इसी दौरान एक गांव के समीप उन्हें सागौन के 9 लट्ठे लावारिस हालत में मिले। तस्कर वन विभाग की कार्रवाई की भनक लगते ही मौके से फरार हो गए थे। वन विभाग ने जब आसपास के गांवों में छानबीन शुरू की तो शुरुआती दौर में आरोपियों का कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद अधिकारियों ने लगातार क्षेत्र में भ्रमण, मुखबिर तंत्र और स्थानीय स्तर पर जानकारी एकत्रित करने का अभियान चलाया। लगभग 20 दिनों की मेहनत के बाद तस्करी में शामिल लोगों की पहचान सुनिश्चित हुई।
सुबह 5 बजे की दबिश, दोनों आरोपी गिरफ्तार
जांच में मिले पुख्ता सबूतों के आधार पर 18 जून 2026 को वन विभाग की टीम ने रंगधामपेठा गांव में तड़के करीब 5 बजे छापा मारा। कार्रवाई के दौरान आरोपी उमेश किट्ट्या बोरे और महेंद्र किट्ट्या बोरे को उनके घरों से गिरफ्तार कर लिया गया।
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी शासकीय जंगलों से सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई कर लकड़ी को बैलगाड़ियों के माध्यम से नदी किनारे तक पहुंचाते थे। इसके बाद लकड़ी को तेलंगाना राज्य में बेचने की व्यवस्था की जाती थी। प्राथमिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि तस्करी का यह कारोबार संगठित रूप से संचालित किया जा रहा था और इसमें अन्य लोगों की भी संलिप्तता हो सकती है। वन विभाग के अनुसार आरोपियों ने पूछताछ के दौरान लंबे समय से इस प्रकार की गतिविधियों में शामिल रहने की बात स्वीकार की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है और अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम 1927 तथा महाराष्ट्र वन नियमावली के तहत मामला दर्ज किया गया है। न्यायालय में पेश किए जाने के बाद अदालत ने आरोपियों को दो दिन की वन हिरासत (वनकोठडी) में भेज दिया है। अधिकारियों के मार्गदर्शन में सफल कार्रवाई यह पूरी कार्रवाई उपवनसंरक्षक एस. नवकिशोर रेड्डी (IFS), उपविभागीय वन अधिकारी अभय मिना (IFS) के मार्गदर्शन में तथा आसारअल्ली वनपरिक्षेत्र अधिकारी एस. ए. पानगे के नेतृत्व में वन कर्मचारियों एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मियों की टीम ने अंजाम दी। उपविभागीय वन अधिकारी अभय मिना ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी संदिग्ध लकड़ी परिवहन, अवैध कटाई या वन संपदा की तस्करी की जानकारी मिले तो तत्काल वन विभाग को सूचित करें। उपवनसंरक्षक एस.नवकिशोर रेड्डी ने कहा कि वन संपदा देश की अमूल्य प्राकृतिक धरोहर है। सागौन जैसे बहुमूल्य वृक्षों की अवैध कटाई और तस्करी से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचता है। वन विभाग ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी इसी प्रकार की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम वन विभाग की इस कार्रवाई को क्षेत्र में सागौन तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। लगातार बढ़ती निगरानी और सख्त कार्रवाई से जंगलों की सुरक्षा मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है। स्थानीय नागरिकों ने भी वन विभाग की तत्परता और तस्करों के खिलाफ की गई कार्रवाई की सराहना की है।
रिपोर्टर - चंद्रशेखर पुलगम
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