चलती बस का पहिया निकला; 28 यात्रियों की जान बाल-बाल बची!
गड़चिरोली - अहेरी डिपो से सिरोंचा जा रही एसटी बस का पिछला पहिया अचानक निकलकर करीब 100 फीट दूर जा गिरने की चौंकाने वाली घटना मेलाराम गांव के पास हुई। जिस समय यह घटना हुई,उस समय बस में 28 यात्री सवार थे। अचानक पहिया निकल जाने से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। चालक ने समय रहते सूझबूझ दिखाते हुए स्थिति को नियंत्रित कर लिया,जिससे बड़ा हादसा टल गया और किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
मिली जानकारी के अनुसार,MH-40 AQ-6125 क्रमांक की एसटी बस अहेरी डिपो से सिरोंचा की ओर जा रही थी। मेलाराम गांव के पास बस चल रही थी, तभी उसके पिछले हिस्से का पहिया अचानक निकल गया। पहिया बस से करीब 100 फीट दूर जाकर गिरा। पहिया निकलने की जानकारी होते ही चालक ने तत्काल स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। चालक की सतर्कता और सूझबूझ के चलते बस में सवार 28 यात्रियों की जान बच गई। घटना के बाद यात्रियों में काफी भय का माहौल बन गया। चलती बस का पहिया ही निकल जाना एसटी महामंडल की बसों के रखरखाव,तकनीकी जांच और यात्री सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
‘प्री-ट्रिप’ और नट-बोल्ट की जांच हुई थी, फिर पहिया कैसे निकला?
इस घटना के संबंध में अहेरी डिपो के डिपो मैनेजर खाडिलकर से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि बस का प्री-ट्रिप इंस्पेक्शन किया गया था तथा नट-बोल्ट की भी जांच की गई थी। फिलहाल संबंधित बस सिरोंचा डिपो में होने की जानकारी दी गई है। बस के अहेरी डिपो लौटने के बाद उसकी विस्तृत तकनीकी जांच की जाएगी। इसके बाद पहिया आखिर किस तकनीकी कारण से निकला, यह स्पष्ट हो सकेगा, ऐसा भी उन्होंने बताया। हालांकि,यहां सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यदि बस को सड़क पर रवाना करने से पहले प्री-ट्रिप इंस्पेक्शन किया गया था और नट-बोल्ट की भी जांच की गई थी, तो फिर यात्रा के दौरान बस का पिछला पहिया निकलने की नौबत क्यों आई?
जनहानि नहीं हुई,लेकिन सुरक्षा का सवाल कायम
इस घटना में सौभाग्य से किसी की जान नहीं गई। लेकिन “जनहानि नहीं हुई” का अर्थ यह नहीं कि “खतरा नहीं था।” जिस समय पहिया निकलकर गिरा, उसी समय सामने से कोई वाहन आ रहा होता, सड़क पर कोई दोपहिया चालक या पैदल यात्री होता अथवा चालक को स्थिति का पता कुछ क्षण देर से चलता, तो इसके परिणाम कितने गंभीर हो सकते थे, इसकी कल्पना करना भी भयावह है।
विशेष रूप से ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में लंबी दूरी की एसटी बसों से यात्रा करने वाले नागरिकों के लिए यात्री सुरक्षा और महामंडल पर भरोसा बेहद महत्वपूर्ण विषय है। महामंडल केवल ‘जांच’ तक सीमित न रहे, जिम्मेदारी तय करे घटना के मूल कारण का पता लगाने के लिए केवल संबंधित बस की तकनीकी जांच करना पर्याप्त नहीं होगा। बस की जांच किसने की? जांच के दौरान पहिया और नट-बोल्ट सही स्थिति में होने की पुष्टि कैसे की गई? जांच का रिकॉर्ड क्या है? पहिया निकलने का वास्तविक तकनीकी कारण क्या है? इन सभी सवालों के जवाब यात्रियों और आम नागरिकों को मिलना जरूरी है।
अहेरी डिपो से संचालित होने वाली सभी एसटी बसों के व्हील असेंबली, नट-बोल्ट,ब्रेक सिस्टम तथा अन्य महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरणों की विशेष एवं दोबारा जांच की जाए,ऐसी मांग अब जोर पकड़ रही है। एक पहिया निकला और 28 जिंदगियां बच गईं—यह केवल हादसा टलने की घटना नहीं, बल्कि भविष्य में होने वाली किसी बड़ी दुर्घटना को रोकने के लिए एसटी महामंडल के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
रिपोर्टर – प्रशांत नामनवार
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