तीन मासूम बेटियों की मौत के बाद जागा प्रशासन! सर्पदंश कांड में दो अधिकारियों पर गिरी गाज

गड़चिरोली :- जिले के धानोरा तहसील के जपतलाई स्थित अनुदानित आदिवासी आश्रमशाला में सर्पदंश की दर्दनाक घटना में तीन छात्राओं की मौत के मामले ने आखिरकार प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। घटना की गंभीरता को देखते हुए आदिवासी विकास विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सहायक परियोजना अधिकारी (शिक्षा) पी. पी. सादमवार और कनिष्ठ शिक्षा विस्तार अधिकारी कन्नाके को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई अपर आयुक्त आयुषी सिंह द्वारा महाराष्ट्र नागरी सेवा नियमों के तहत की गई है।

इस घटना में सुष्मिता मंडल (14) दीपिका लकड़ा (12) और अनु कोरेटी (8) नामक तीन छात्राओं की सर्पदंश के कारण मौत हो गई थी। बताया गया कि कुल छह छात्राओं को सांप ने डसा था। तीन मासूम छात्राओं की मौत के बाद आश्रमशाला की सुरक्षा व्यवस्था, स्वच्छता, प्रशासनिक निगरानी और विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जाने वाली आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं पर गंभीर सवाल उठे थे।

पहले निरीक्षण, फिर भी नहीं सुधरी व्यवस्था

मामले की जांच में सामने आया कि संबंधित अधिकारियों द्वारा आश्रमशाला का पहले निरीक्षण किया जा चुका था। सहायक परियोजना अधिकारी पी.पी.सादमवार ने 10 फरवरी और 1 अप्रैल 2026 को आश्रमशाला का निरीक्षण किया था। इसके बावजूद वहां पाई गई गंभीर कमियों को दूर करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। जांच के दौरान आश्रमशाला के शौचालय और स्नानगृहों में गंदगी, छात्रावास परिसर में कचरा और लकड़ी का ढेर जैसी स्थितियां सामने आईं। ऐसे स्थानों पर जहरीले सांपों का खतरा बना रहने के बावजूद सुरक्षा के पर्याप्त उपाय नहीं किए गए।

प्राथमिक उपचार की सुविधा तक नहीं!

सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि आश्रमशाला में प्राथमिक उपचार की आवश्यक व्यवस्था तक पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं थी। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ छात्राएं जमीन पर सोने के लिए मजबूर थीं। ऐसे में सवाल उठता है कि आदिवासी विद्यार्थियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा समय रहते गंभीरता क्यों नहीं दिखाई गई?

सर्पदंश जैसी आपात स्थिति में प्रत्येक मिनट महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में तत्काल प्राथमिक उपचार, एंटी-स्नेक वेनम की उपलब्धता तथा नजदीकी अस्पताल तक तेजी से पहुंचाने की व्यवस्था जरूरी होती है। लेकिन इस घटना ने आश्रमशालाओं में आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्कूल की मान्यता भी स्थायी रूप से रद्द

तीन छात्राओं की मौत के बाद प्रशासन ने संबंधित अनुदानित आश्रमशाला के खिलाफ भी कड़ा कदम उठाया है। जांच और स्पष्टीकरण की प्रक्रिया के बाद स्कूल की मान्यता स्थायी रूप से रद्द कर दी गई है। वहीं,स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के भविष्य को देखते हुए उन्हें अभिभावकों की सहमति से भामरागड़, गड़चिरोली और अहेरी परियोजनाओं के अंतर्गत आने वाली अन्य आश्रमशालाओं में समायोजित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

स्कूल प्रबंधन पर भी मामला दर्ज

इस मामले में केवल सरकारी अधिकारियों पर ही कार्रवाई नहीं हुई है, बल्कि आश्रमशाला प्रबंधन के जिम्मेदार पदाधिकारियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की गई है। संस्था के पदाधिकारियों, मुख्याध्यापक तथा अधीक्षक समेत संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।

तीन मौतों के बाद आखिरकार तय हुई जिम्मेदारी

जपतलाई आश्रमशाला की घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया था कि आखिर आदिवासी विद्यार्थियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? यदि अधिकारियों ने पहले ही निरीक्षण के दौरान कमियां देखी थीं, तो उन्हें समय रहते दूर क्यों नहीं किया गया? छात्रावास परिसर में स्वच्छता, सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने में लापरवाही क्यों बरती गई? दो अधिकारियों के निलंबन और आश्रमशाला की मान्यता रद्द किए जाने से प्रशासन ने अब जिम्मेदारी तय करने की दिशा में कदम उठाया है। हालांकि,तीन मासूम छात्राओं की जान वापस नहीं लाई जा सकती। अब सबसे बड़ी जरूरत यह है कि जिले की सभी आदिवासी आश्रमशालाओं की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक जांच की जाए। छात्रावास परिसर की नियमित सफाई, सांप एवं अन्य जहरीले जीवों से बचाव के उपाय, प्राथमिक उपचार किट, आवश्यक दवाइयां, प्रशिक्षित कर्मचारी और तत्काल अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी और मासूम को ऐसी दर्दनाक कीमत न चुकानी पड़े।

तीन छात्राओं की मौत के बाद हुई यह कार्रवाई सिर्फ दो अधिकारियों के निलंबन तक सीमित न रहे,बल्कि आश्रमशालाओं की पूरी व्यवस्था में स्थायी सुधार का कारण बने—यही अब अभिभावकों और नागरिकों की सबसे बड़ी अपेक्षा है।

रिपोर्टर - चंद्रशेखर पुलगम

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