आत्मसमर्पण प्रक्रिया के लिए सरकार से कोंबिंग ऑपरेशन अस्थायी रूप से रोकने की मांग
गढ़चिरोली : भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से एक बड़ा और ऐतिहासिक संदेश सामने आया है। संगठन ने अपनी केंद्रीय कमेटी की ओर से महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश सरकार को एक पत्र जारी कर पूर्ण रूप से हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करने की इच्छा जताई है। लंबे समय से जंगल और पहाड़ों में सक्रिय माओवादी कैडर अब मुख्यधारा में लौटने के लिए तैयार बताए जा रहे हैं। संगठन की ओर से जारी बयान के अनुसार, कई राज्यों में सुरक्षा बलों की लगातार अभियानात्मक दबाव, विकास और पुनर्वसन योजनाओं का प्रभाव, तथा आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती उपलब्धता के चलते माओवादियों में आत्मसमर्पण की इच्छा बढ़ी है।
सरकार से ‘तात्पुरते कोंबिंग अभियान स्थगन’ की मांग
पत्र में माओवादियों ने सरकार से अपील करते हुए कहा है कि वे बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण के लिए आगे आने को तैयार हैं, लेकिन इसके लिए सुरक्षा बलों का कोंबिंग ऑपरेशन कुछ समय के लिए रोका जाए ताकि माओवादी बिना भय के जंगलों से बाहर निकल सकें। सूत्रों के अनुसार, माओवादी नेतृत्व ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे राजनीतिक वार्ता और संविधान के दायरे में समाधान के लिए तैयार हैं।
अंदरूनी टूट और हताशा का भी अहम कारण
जानकारी के मुताबिक माओवादी संगठन के अंदर लगातार हो रही मौतें, एनकाउंटर, गिरफ्तारियां, संसाधनों की कमी और कमांड संरचना में टूट—इन सबके कारण संगठन बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच चुका है। कई वरिष्ठ और तकनीकी कैडर पहले ही सुरक्षा एजेंसियों के समक्ष आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जिससे शेष सदस्य भी विकल्प तलाश रहे हैं।
केंद्र और राज्य सरकारों की प्रतिक्रिया
सरकार के उच्च अधिकारियों ने पत्र प्राप्त होने की पुष्टि तो नहीं की है, लेकिन यह संकेत मिला है कि इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिक चिंता यह है कि कोंबिंग ऑपरेशन रोकने से सुरक्षा जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, विश्वसनीय और व्यवस्थित समन्वय के साथ चरणबद्ध आत्मसमर्पण योजनाओं पर बातचीत संभव मानी जा रही है।
पुनर्वसन पैकेज पर विचार
यदि आत्मसमर्पण प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो सरकार द्वारा पहले से लागू पुनर्वसन नीति — आर्थिक सहायता, रोजगार, शिक्षा, आयुष्मान स्वास्थ्य लाभ और आवास योजना को और मजबूत करने पर विचार किया जा सकता है।
क्षेत्र में व्यापक असर
यदि पूरी तरह हथियारबंदी हो जाती है तो महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, ओडिशा और झारखंड सहित नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में
ग्रामीण विकास सड़क एवं संचार नेटवर्क स्वास्थ्य एवं शिक्षा रोजगार अवसर में तेजी आने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मत:
आत्मसमर्पण की यह पहल पिछले चार दशकों में पहली बार इतनी व्यापक और संगठन-स्तर की मानी जा रही है। यदि यह वास्तव में कार्यान्वित होती है तो देश में माओवादी उग्रवाद के अंत की दिशा में यह निर्णायक कदम साबित हो सकता है।
रिपोर्टर - चंद्रशेखर पुलगम
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