कानून का उल्लंघन कर आश्रय या नौकरी देने वाले तत्वों के विरुद्ध भी मामला दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी : हर्ष संघवी

गांधीनगर : गुजरात की आंतरिक सुरक्षा, शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गुजरात पुलिस द्वारा सघन अभियान 'ऑपरेशन डेल्टा हंट' शुरू किया गया है। 'ऑपरेशन डेल्टा हंट' के तहत 362 अवैध बांग्लादेशियों की गिरफ्तारी तथा 782 से अधिक संदिग्धों से गहन पूछताछ की जा रही है।

ऑपरेशन के संबंध में अधिक जानकारी देते हुए उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर राज्य सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के अंतर्गत राज्य की सीमाएँ पार कर अवैध रूप से आश्रय लेकर रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों एवं घुसपैठियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई शुरू की गई है। राज्य की सुरक्षा से छेड़छाड़ करने वाले प्रत्येक घुसपैठिए को गुजरात के कोने-कोने से खोज निकालकर, उन पर कानून का शिकंजा कसते हुए उन्हें बांग्लादेश भेजने की कार्रवाई की जा रही है।
इस ऑपरेशन के तहत अब तक राज्यभर से कुल 362 अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 103 पुरुष, 188 महिलाएँ और 71 बच्चे शामिल हैं। ऑपरेशन के अंतर्गत राज्य में सबसे अधिक 155 बांग्लादेशी नागरिक अहमदाबाद शहर से पकड़े गए हैं। इसके अलावा सूरत शहर से 84, अहमदाबाद ग्रामीण से 34, पूर्व कच्छ-गांधीधाम से 13 तथा भरूच से 12 सहित विभिन्न क्षेत्रों से अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिक पकड़े गए हैं। इस अभियान के दौरान बड़ी संख्या में अर्थात 782 से अधिक संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिक भी पाए गए हैं, जिनसे वर्तमान में गहन पूछताछ और जाँच की जा रही है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि टेक्नोलॉजी तथा ह्यूमन इंटेलिजेंस की सहायता से गुजरात पुलिस की फील्ड यूनिटें केवल इन व्यक्तियों की ही नहीं, बल्कि उन्हें अवैध रूप से सिम कार्ड, आश्रय, नौकरी अथवा नकली आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र जैसे फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराने वाले स्थानीय एजेंटों और सहयोगियों की भी पहचान कर रही हैं। घुसपैठियों की सहायता करने वालों को भी बख्शा नहीं जाएगा। पकड़े गए सभी अवैध नागरिकों को नियमानुसार डिटेन किया गया है और उन्हें देश से बाहर डिपोर्ट करने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है।
उन्होंने जोड़ा कि पुलिस द्वारा इस ऑपरेशन की अत्यंत सूक्ष्मता से योजना बनाई गई थी। शहरों में रेड शुरू होते ही संभावित घुसपैठिए राज्य से बाहर न भाग जाएँ, इसके लिए सभी बस स्टेशनों, राजमार्गों और रेलवे स्टेशनों पर तत्काल प्रभाव से कड़ी नाकाबंदी कर दी गई थी। इस रणनीतिक नाकाबंदी के कारण छापेमारी के दौरान भागने का प्रयास कर रहे लगभग 18 अन्य संदिग्ध व्यक्तियों को भी नाकाबंदी स्थल से ही पकड़ने में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है।
जाँच के दौरान अनेक मामलों में यह चौंकाने वाली जानकारी भी सामने आई है कि पकड़े गए बांग्लादेशियों में से कुछ लोग 2-4 वर्ष पहले या उससे भी अधिक समय पहले पश्चिम बंगाल के विभिन्न गाँवों और क्षेत्रों के रास्ते भारत में घुसे थे। वहाँ उन्होंने स्थानीय दलालों की मदद से पश्चिम बंगाल के लोकल डॉक्यूमेंट्सज बनवाए और उन्हीं के आधार पर भारत के आधिकारिक आधार कार्ड प्राप्त करने में सफलता प्राप्त की। इस पूरे नेटवर्क की भी पुलिस द्वारा गहन जाँच की जा रही है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पश्चिम बंगाल सीमा पर बीएसएफ की फेंसिंग के कार्य के लिए पश्चिम बंगाल की नई सरकार द्वारा जो भूमि उपलब्ध कराई गई है, उससे आने वाले वर्षों में देश की सीमाएँ अधिक सुरक्षित बनेंगी और भविष्य में ऐसे घुसपैठियों को भारत में प्रवेश करने का अवसर नहीं मिलेगा।
यह 'ऑपरेशन डेल्टा हंट' आने वाले दिनों में भी राज्य के सभी क्षेत्रों और चारों जोनों में जारी रहेगा तथा अवैध रूप से रह रहे प्रत्येक तत्व को खोजकर डिपोर्ट किया जाएगा।
एक ही रात में इतने बड़े पैमाने पर की गई इस कार्रवाई को गुजरात पुलिस की एक 'ऐतिहासिक सफलता' बताते हुए उप मुख्यमंत्री ने सभी पुलिस यूनिटों को अभिनंदन दिया।
राज्य के पुलिस महानिदेशक डॉ. के. एल. एन. राव ने कहा कि यह अभियान पूरी तरह टेक्निकल डेटा और फील्ड वेरीफिकेशन पर आधारित है। 'साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' से प्राप्त तकनीकी तथा स्थानीय सूचनाओं के आधार पर गुजरात में व्यापक दूरसंचार विश्लेषण किया गया था। इसके आधार पर ऐसे भारतीय मोबाइल नंबरों का डेटाबेस तैयार किया गया है, जिन्होंने वास्तव में बांग्लादेश के नंबरों से बातचीत की थी। इस पद्धति से 6200 से अधिक संदिग्ध बांग्लादेशियों का डेटाबेस एकत्र कर अवैध नेटवर्क को तोड़ने के लिए जमीनी स्तर पर कार्रवाई शुरू की गई है।
रिपोर्टर : राकेश शाह 

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