लोककला और लोकनृत्य की त्रिवेणी से सजा कुंभ कल्प मेला

राजिम :  कुंभ कल्प मेला के सातवें दिन स्थानीय मंच पर लोककला, लोकसंस्कृति और लोकनृत्य की त्रिवेणी निरंतर प्रवाहित होती रही। कार्यक्रम सुबह 11 बजे से प्रारंभ होकर शाम 6 बजे तक चला, जिसमें विभिन्न अंचलों से आए कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।

सिंधौरी के हेमंत यादव ने पारंपरिक राउत नाचा प्रस्तुत कर उपस्थित दर्शकों के बीच विशेष पहचान बनाई। वहीं लखना की पुनाबाई ध्रुव की टीम ने सुवा नृत्य की प्रस्तुति दी। कोसमबुड़ा के निर्मल सिंह ध्रुव ने आदिवासी नृत्य के माध्यम से जनजातीय संस्कृति को जीवंत रूप में उकेरा।
पेटुलकांपा के आदित्यनारायण ने सुगम गायन से श्रोताओं को भावविभोर किया, जबकि रानीपरतेवा के कैलाश शुक्ला ने लोकनृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी। नवापारा के सूरज साहू ने लोककला मंच पर छत्तीसगढ़ी गीतों से समा बांधा, वहीं गरियाबंद के ललित निर्मलकर ने लोकनृत्य प्रस्तुत किया।
इसी प्रकार पुराने महोत्सव स्थल स्थित नदी मंच पर भी सांस्कृतिक कार्यक्रम की शानदार प्रस्तुति हुई। यहां बागबाहरा के श्रीहरिकेश मंगलम ने संगीतमय प्रस्तुति दी। मोतिनपुर के नारायण साहू ने मानस गायन किया, सरस्वती शिशु मंदिर, रानीपरतेवा के विद्यार्थियों ने बारहमासी नृत्य प्रस्तुत किया, जबकि पुनाबाई बंछोर, खट्टी ने पंडवानी की सशक्त प्रस्तुति देकर दर्शकों की सराहना बटोरी। लोक कलाओं की इन रंग-बिरंगी प्रस्तुतियों ने कुंभ कल्प मेले के सांस्कृतिक स्वरूप को और अधिक भव्य बना दिया। कलाकारों का सम्मान स्मृति चिन्ह प्रदान कर किया गया।

रिपोर्टर : मनोज गोस्वामी

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