मनरेगा के 30 करोड़ सहित मूलभूत और 16वें वित्त की राशि अटकी
गरियाबंद : गांव के विकास की धुरी कही जाने वाली ग्राम पंचायतें आज खुद आर्थिक तंगी से जूझ रही हैं। मनरेगा, मूलभूत और 16वें वित्त आयोग की राशि महीनों से नहीं मिलने से जिले की पंचायतें ठप पड़ गई हैं। नाराज जिला सरपंच संघ ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। बकाया भुगतान के लिए सरपंच कटोरा लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचेंगे।
जिला सरपंच संघ गरियाबंद द्वारा 2 नवंबर को मुख्यमंत्री, पंचायत मंत्री, कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ को ज्ञापन सौंपकर लंबित राशि तत्काल जारी करने की मांग की गई है।
30 करोड़ का भुगतान 8 माह से लंबित
संघ के अनुसार मनरेगा के तहत मजदूरी और सामग्री के लगभग 30 करोड़ रुपये के बिल 8 माह से लंबित हैं। वहीं मूल्यांकन-सत्यापन के बाद भी निर्माण कार्यों के भुगतान 5-6 माह से अटके हैं। मूलभूत और 16वें वित्त आयोग की राशि नहीं मिलने से नए विकास कार्य शुरू नहीं हो पा रहे हैं। उपसरपंच और पंचों का मानदेय भी नहीं मिला है। (उक्त आंकड़ों की विभागीय पुष्टि होना शेष है)
जिलाध्यक्ष बोले- बदहाली दूर करे सरकार
जिलाध्यक्ष हरीश साहू ने कहा कि ग्राम पंचायतें विकास की नींव हैं। भुगतान नहीं होने से सरपंचों पर कर्ज का बोझ और मजदूरों पर आर्थिक संकट है। सरकार तत्काल भुगतान करे, यह व्यक्तिगत नहीं बल्कि मजदूरों की मेहनत का सवाल है। मांग पूरी नहीं हुई तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन तेज किया जाएगा।
प्रमुख मांगें
1. मनरेगा मजदूरी व सामग्री की लंबित राशि तत्काल जारी हो।
2. मूलभूत और 16वें वित्त की राशि उपलब्ध कराई जाए।
3. उपसरपंच-पंचों का मानदेय और पूर्ण कार्यों की राशि जारी हो।
4. लंबित फाइलों का शीघ्र निराकरण हो।
कटोरा लेकर प्रदर्शन
संघ ने चेतावनी दी है कि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो गरियाबंद बस स्टैंड से कटोरा लेकर कलेक्ट्रेट तक प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद भी सुनवाई नहीं हुई तो धरना और चक्काजाम किया जाएगा।
रिपोर्टर : मनोज गोस्वामी

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