चांद की चौखट पर ठहरी सुहाग की आस, छलनी में दिखा प्रेम का संसार
गाजीपुर : सिधौना करवा चौथ पर बादल भरे आकाश में व्रती महिलाएं टकटकी लगाए चांद को निहारती रहीं। बूंदाबांदी की वजह से करवा चौथ की रात्रि व्रती सुहागिनों ने छत और आंगन के बजाय बरामदे और कमरों में पूजन मंडप बनाकर करवा कथा श्रवण किया। शिव पार्वती सहित गणेश की पूजा अर्चना में व्रती सुहागिनें विधिविधान पूर्वक पूजा अर्चना किया। जब चंद्रमा को अर्ध्य देने का समय आया तब सबकी टकटकी आसमान की ओर लग गयी। काले घने बादलों में चांद भी व्रतियों की कठिन परीक्षा लेने लगे। घर के बाकी सदस्य दूर शहरों में बसे स्वजनों से वहां चांद दिखने और मोबाइल पर लाइव देखने की कोशिश में लग गए। सुबह से ही हो रहे बरसात की वजह से व्रती महिलाएं अपने कर्मकांडी ब्राह्मणों और मंदिर के पुजारियों से चांद न दिखने पर वैकल्पिक व्यवस्था की जानकारी ले रहीं थी। व्रतियों ने चंद्रोदय समय बीतने पर शिवपार्वती के तस्वीरों में शिव के मस्तक पर सजे चंद्रमा का दर्शन किया। चंद्रोदय समय के उपरांत पूर्वोत्तर दिशा की ओर अर्ध्य देकर व्रत का पारण किया गया। करवा चौथ का उत्सव धार्मिक अनुष्ठानों, पारंपरिक श्रृंगार और पारिवारिक मेल मिलाप के जरिए भारतीय संस्कृति की जीवंतता को दर्शाता है। यह केवल व्रत रखने या चंद्रमा के दर्शन करने तक सीमित नहीं है बल्कि यह पति पत्नी को एक दूसरे के प्रति प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारियों को महसूस करने का अवसर भी देता है।
रिपोर्टर - गोविन्द कुमार

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