गाजियाबाद में सूर्या के कातिल असद का एनकाउंटर!
योगी की फटकार, चंद घंटों में 'ठोक' दिया हत्यारा! जी हां इसे कहते हैं उत्तर प्रदेश पुलिस का ऑन-द-स्पॉट इंसाफ! जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक कड़क फटकार पड़ी नहीं कि खाकी ने पाताल से भी अपराधी को खींच निकाला और सीधे यमराज के घर का टिकट थमा दिया। गाजियाबाद के खोड़ा इलाके में मासूम 17 साल के सूर्या चौहान की बेरहमी से हत्या करने वाले ₹50,000 के इनामी मुख्य आरोपी असद को पुलिस ने तड़के सुबह एक खौफनाक मुठभेड़ में ढेर कर दिया है। जिस कातिल ने बकरीद के दिन एक मां का इकलौता चिराग बुझाया था, आज उसी कातिल का खून गाजियाबाद की सड़कों पर बिखरा पड़ा था। आइए आपको बताते हैं खोड़ा से लेकर इंदिरापुरम के उस खूनी रास्ते की पूरी कहानी, जहां पुलिस और बदमाशों के बीच ऐसी गोलियां चलीं कि पूरा इलाका दहल उठा!
दरअसल, यह खौफनाक दास्तान शुरू होती है बकरीद के पवित्र त्योहार के दिन। गाजियाबाद के खोड़ा थाना क्षेत्र के नवनीत विहार का माहौल त्योहार की खुशियों में डूबा था। तभी कुछ तथाकथित दोस्त 17 साल के किशोर सूर्या चौहान को उसके घर से बुलाकर ले जाते हैं। सूर्या के सीधे-साधे परिजनों को लगा कि बच्चे त्योहार की खुशियों में घूमने-फिरने जा रहे हैं, लेकिन उन्हें क्या पता था कि सूर्या जिन लड़कों के साथ जा रहा है, वे दोस्त नहीं बल्कि आस्तीन के सांप और कसाई हैं! आरोपियों के दिमाग में एक ऐसी साजिश पल रही थी जिसे सुनकर किसी भी इंसान का कलेजा कांप जाए। सुनसान जगह पर ले जाकर इन दरिंदों ने मासूम सूर्या को घेरा। हमला करने से ठीक पहले मुख्य आरोपी असद ने बेहद क्रूरता के साथ सूर्या से कहा..."कभी बकरा हलाल होते देखा है? आओ आज तुम्हें दिखाते हैं।" इसके बाद जो हुआ, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। असद और उसके साथियों ने सूर्या पर चाकुओं से ताबड़तोड़ इतने वार किए, इतनी बेरहमी से पेट को गोदा कि उस मासूम बच्चे की आंतें तक बाहर आ गईं।
इस वीभत्स हत्याकांड का एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया, जिसने जिसने भी देखा उसकी रूह कांप गई। सूर्या को लहूलुहान हालत में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बाद भी उस तड़पते हुए बच्चे ने दम तोड़ दिया। वहीं इस जघन्य हत्याकांड की खबर जंगल में आग की तरह फैली। पूरे खोड़ा इलाके में सांप्रदायिक तनाव फैल गया। हिंदू संगठनों के लोग सड़कों पर उतर आए और भारी आक्रोश जताते हुए आरोपियों को तुरंत फांसी या एनकाउंटर की मांग करने लगे। वहीं शनिवार को जब सूर्या का शव पोस्टमॉर्टम के बाद उसके घर पहुंचा, तो पूरे इलाके में कोहराम मच गया। मां सरोज का रो-रोकर बुरा हाल था, उनकी चीखों से आसमान फट रहा था।
परिजनों और गुस्साए लोगों ने दो टूक कह दिया कि "जब तक मुख्य आरोपी असद का एनकाउंटर नहीं होगा, तब तक हम सूर्या का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।" माहौल बिगड़ता देख भारी पुलिस फोर्स तैनात की गई। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने घंटों हाथ-पैर जोड़े, मिन्नतें कीं और सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया, तब जाकर भारी सुरक्षा के बीच शनिवार को सूर्या की अंत्येष्टि की जा सकी।
इधर शनिवार को ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर आला अधिकारियों की एक हाई-लेवल मीटिंग ली थी। मीटिंग में सीएम योगी का पारा सातवें आसमान पर था। उन्होंने अधिकारियों को सख्त लहजे में अल्टीमेटम देते हुए कहा था...."अगर आपसे कानून-व्यवस्था नहीं संभल रही है, तो साफ-साफ बता दो!" मुख्यमंत्री की इस कड़क फटकार का असर ऐसा हुआ कि गाजियाबाद पुलिस के आला अफसरों के पसीने छूट गए। पुलिस कमिश्नरेट ने बिना एक पल गंवाए रात में ही जाल बिछा दिया। खोड़ा पुलिस और स्वाट की टीमों को एक्टिव किया गया। इसी बीच मुखबिर तंत्र से पुलिस को एक पुख्ता और सटीक सूचना मिली। पता चला कि ₹50,000 का इनामी और इस हत्याकांड का चौथा मुख्य आरोपी असद अपने किसी दोस्त से पैसे ऐंठने के लिए खोड़ा इलाके में आने वाला है। उसका प्लान था कि पैसे मिलते ही वह गाजियाबाद और उत्तर प्रदेश की सीमा से हमेशा के लिए रफूचक्कर हो जाएगा।
पुलिस ने इस सूचना को अपना आखिरी मौका माना और इंदिरापुरम इलाके के पास तगड़ी घेराबंदी कर दी। तड़के सुबह का वक्त था, चारों तरफ हल्का अंधेरा और सन्नाटा पसरा हुआ था। तभी इंदिरापुरम इलाके के पास एक बिना नंबर की मोटरसाइकिल आती दिखाई दी, जिस पर दो युवक सवार थे। बाइक पर पीछे बैठा शख्स कोई और नहीं बल्कि पुलिस की रडार पर चल रहा कातिल असद था। पुलिस की संयुक्त टीम ने तुरंत घेरा डाला और उन्हें रुकने का इशारा किया। खाकी को सामने देख असद समझ गया कि उसका काल सामने खड़ा है। लेकिन आत्मसमर्पण करने के बजाय असद ने अपनी कमर से देसी पिस्तौल निकाली और सीधे पुलिस टीम पर गोलियों की बौछार कर दी। असद की तरफ से गोली चलते ही पुलिस ने भी पोजीशन ली और 'ठोक दो' का आदेश गूंज उठा। दोनों तरफ से देखते ही देखते ताबड़तोड़ करीब 50 राउंड फायरिंग हुई। गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा इलाका गूंज उठा। इस भीषण क्रॉस-फायरिंग में असद की चलाई एक गोली ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस कॉन्स्टेबल को जा लगी, जिससे वह घायल हो गया।
वहीं, पुलिस की जवाबी कार्रवाई में अचूक निशाना साधते हुए गोलियां सीधे असद के सीने और पैर को चीरती हुई पार हो गईं। असद खून से लथपथ होकर मोटरसाइकिल से नीचे गिरा और तड़पने लगा। हालांकि, इस अंधाधुंध गोलीबारी और तड़के के अंधेरे का फायदा उठाकर मोटरसाइकिल चला रहा उसका दूसरा साथी मौके से भागने में कामयाब रहा। पुलिस ने तुरंत घायल असद को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। मौके से पुलिस ने वह बिना नंबर वाली बाइक और वो देसी पिस्तौल बरामद कर ली है जिससे पुलिस पर गोलियां चलाई जा रही थीं। फरार पांचवें आरोपी की तलाश में पुलिस की कई टीमें इलाके में खोजबीन कर रही हैं। वहीं जैसे ही तड़के सुबह असद के एनकाउंटर की खबर सूर्या के घर पहुंची, मां सरोज के आंसू छलक पड़े।
उन्होंने भरे गले से गाजियाबाद पुलिस और योगी सरकार का आभार व्यक्त किया, लेकिन एक इकलौते बेटे को खोने वाली मां का गुस्सा और कलेजे की आग अभी शांत नहीं हुई है। सूर्या की मां ने कहा "पुलिस ने मुझे न्याय दिलाया, उसके लिए धन्यवाद। लेकिन मुझे असद के एनकाउंटर वाली तस्वीर दिखाई जाए। मैं देखना चाहती हूं कि मेरे बेटे के कातिल का क्या हश्र हुआ। जैसे उसने मेरे इकलौते चिराग को बुझाकर हमें सड़क पर ला दिया, वैसे ही अब उनके घरों पर बुलडोजर चलना चाहिए। उनके 5 से 8 बच्चे होते हैं, एक मर भी गया तो बाकी बचेंगे, लेकिन मेरा तो इकलौता सहारा छीन लिया।" आपको बता दें पुलिस इस मामले में पहले ही 3 आरोपियों को जेल भेज चुकी है, असद ढेर हो चुका है और अब पांचवें फरार आरोपी की तलाश के लिए दबिश दी जा रही है।
जाहिर है गाजियाबाद पुलिस के इस ताबड़तोड़ और तड़कते-भड़कते एक्शन ने उत्तर प्रदेश में अपराधियों को एक बार फिर साफ और सीधा संदेश दे दिया है कि अगर मासूमों पर हाथ उठाया, कानून को हाथ में लिया या खाकी पर गोली चलाने की हिमाकत की, तो अंजाम ठीक असद जैसा ही होगा। सूर्या के परिवार को न्याय की पहली किस्त मिल चुकी है, और अब देखना यह है कि बाबा का बुलडोजर कातिलों के आशियाने को कब मिट्टी में मिलाता है!
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