गाजीपुर कांड पर अखिलेश यादव और योगी के मंत्रियों में आर-पार
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में एक युवती की मौत ने पूरे प्रदेश की राजनीतिक फिजा में आग लगा दी है! यह सिर्फ एक अपराध की कहानी नहीं रह गई है, बल्कि लखनऊ से लेकर दिल्ली तक की सियासत का केंद्र बन गई है। जी हां एक तरफ समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव इसे जंगलराज और बीजेपी संरक्षित अपराध करार दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ योगी सरकार के मंत्री इसे प्रेम प्रसंग और आत्महत्या बताकर विपक्ष पर दंगा भड़काने का आरोप लगा रहे हैं। गाजीपुर का कटरिया गांव आज छावनी में तब्दील है और नेताओं के बीच जुबानी गोलियां चल रही हैं। कांग्रेस सांसद का अनशन, सपा का डेलिगेशन और पुलिस की FIR...गाजीपुर की धरती पर इस वक्त हाई-वोल्टेज ड्रामा जारी है!
दरअसल, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आज लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार की ईंट से ईंट बजा दी। अखिलेश यादव ने तीखे अंदाज में सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि गाजीपुर में उनके प्रतिनिधिमंडल पर जो पथराव हुआ, वह सरकार के इशारे पर हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्थरबाजों के पास हथियार थे और वे गंभीर मुकदमों वाले अपराधी थे, फिर भी पुलिस ने उन्हें बचाने के लिए सपा कार्यकर्ताओं पर ही केस दर्ज कर दिया। वहीं अखिलेश ने पीड़ित परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि 29 अप्रैल को वह खुद गाजीपुर जाकर परिवार का दर्द बांट सकते हैं।
आपको बता दें अखिलेश यादव ने कटाक्ष किया कि बीजेपी महिलाओं के नाम पर रैलियां तो करती है, लेकिन गाजीपुर की बेटी की तस्वीर तक नहीं देखती। उन्होंने कहा कि यूपी में महिलाओं के खिलाफ अपराध के आंकड़े डराने वाले हैं और सरकार नाइट विजन कैमरों की बात करती है जबकि लोगों को पानी तक नहीं मिल रहा। इसी दौरान उन्होंने चुनावी वादा भी किया कि सपा सरकार आने पर गन्ना किसानों का भुगतान 24 घंटे के भीतर होगा।
वहीं दूसरी तरफ यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कटरिया गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और अखिलेश यादव के दावों की धज्जियां उड़ा दीं। राजभर ने सनसनीखेज दावा किया कि युवती ने प्रेम संबंध के चलते आत्महत्या की है, जबकि अखिलेश यादव इसे रेप और हत्या बताकर झूठ फैला रहे हैं ताकि दंगा भड़के। मंत्री ने कहा कि मृतका के पिता खुद पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट हैं, लेकिन सपा जबरन माहौल खराब कर रही है।
इतना ही नहीं राजभर ने घोषणा की कि योगी सरकार पीड़ित परिवार को 5 लाख रुपये की मदद, 1.5 बीघा जमीन और एक सरकारी आवास देगी। वहीं दूसरी तरफ सियासी आग में घी डालने का काम तब हुआ जब कांग्रेस सांसद राकेश राठौर को गाजीपुर जाने से रोक दिया गया। जी हां पुलिस ने जब सांसद को रोका, तो वे भड़क गए और अपने आवास के बाहर ही 16 घंटे से ज्यादा समय से अनशन पर बैठ गए हैं। सांसद की तबीयत बिगड़ रही है, बीपी और शुगर की समस्या के बावजूद वे इस बात पर अड़े हैं कि शहर कोतवाल के खिलाफ कार्रवाई हो। प्रशासन देर रात तक उन्हें मनाने में जुटा रहा, लेकिन गतिरोध बरकरार है।
वहीं गाजीपुर पुलिस ने भी इस मामले में सख्त रुख अपनाया है। पुलिस ने 'X' पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल हैंडल्स के खिलाफ केस दर्ज किया है। आरोप है कि इन हैंडल्स ने घटना को लेकर निराधार और भ्रामक जानकारी फैलाई, जिससे गांव में तनाव पैदा हुआ। पुलिस ने मुख्य आरोपी हरिओम पांडे को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि 15 अप्रैल को शव मिलने के बाद से ही कुछ लोग अफवाह फैलाकर जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
देखा जाए तो गाजीपुर का यह मामला अब न्याय की लड़ाई से ज्यादा शक्ति प्रदर्शन की जंग बन चुका है। एक तरफ जहां पीड़ित परिवार अपनी बेटी को खोने के गम में डूबा है, वहीं राजनीतिक दल इसे आने वाले चुनावों और वोट बैंक की कसौटी पर कस रहे हैं। 29 अप्रैल का दिन उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए बेहद अहम होने वाला है, क्योंकि एक तरफ प्रधानमंत्री का विकास एजेंडा होगा और दूसरी तरफ अखिलेश यादव का पी़डीए न्याय मार्च। क्या गाजीपुर की बेटी को वाकई इंसाफ मिलेगा, या यह पूरा मामला फाइलों और रैलियों के बीच कहीं दब जाएगा? उत्तर प्रदेश की जनता की नजरें अब सीधे गाजीपुर की सरजमीं पर टिकी हैं!


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