निशुल्क प्रसव सेवा पर सवाल: सरकारी अस्पताल में प्रसूता से 3900 रुपये वसूलने का आरोप गोंडा के बेलसर स्वास्थ्य केंद्र का मामला, जांच और कार्रवाई को लेकर उठे कई सवाल

गोंडा :  सरकार जहां गर्भवती महिलाओं को निशुल्क प्रसव सुविधा, एम्बुलेंस सेवा और मुफ्त उपचार उपलब्ध कराने का दावा करती है, वहीं गोंडा जनपद के बेलसर क्षेत्र से सामने आया एक मामला स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आरोप है कि सरकारी अस्पताल में प्रसव कराने के नाम पर एक प्रसूता से 3900 रुपये वसूल लिए गए।
मामला विकासखंड बेलसर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पकड़ी बाजार, दुबे पुरवा का है। जानकारी के अनुसार कोटिया अमदही निवासी अनीता भारती की तबीयत खराब होने पर परिजन उन्हें प्रसव के लिए स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। जहां 12 जून 2026 को उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में कार्यरत डॉ. साधना सिंह द्वारा प्रसव कराने के एवज में 3900 रुपये की मांग की गई और रकम ली गई। जबकि सरकारी नियमों के अनुसार सरकारी अस्पतालों में प्रसव सेवाएं पूरी तरह निशुल्क हैं तथा मरीजों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए।
मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। लोगों का कहना है कि यदि सरकारी अस्पतालों में भी गरीब और जरूरतमंद मरीजों से पैसे लिए जा रहे हैं तो सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य कैसे पूरा होगा।
इस संबंध में जब मीडिया ने स्वास्थ्य अधीक्षक बेलसर सतपाल सोनकर से बातचीत की तो आरोपों पर तत्काल किसी स्पष्ट जांच या कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई। इससे मामले को लेकर संदेह और गहरा गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकारी अस्पतालों में मरीजों से अवैध वसूली का खेल जारी है? क्या सरकार की निशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं के दावे केवल कागजों तक सीमित हैं? और क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होगी या फिर शिकायत अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगी?
फिलहाल पूरे मामले पर आम जनता और स्वास्थ्य विभाग की नजरें टिकी हुई हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है। वहीं पीड़ित परिवार निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग कर रहा है।


रिपोर्टर : शिवराम पांडे

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