गोंडा हत्याकांड पर गरमाई सियासत! संजय निषाद धरने पर बैठे, अखिलेश के तंज से मचा घमासान

उत्तर प्रदेश के गोंडा में एक सनसनीखेज वारदात ने सूबे की सियासत में भूचाल ला दिया है! जिस कारोबारी पर रास्ते में घेरकर धारदार हथियारों से हमला किया गया...जिसे गंभीर हालत में गोंडा से लखनऊ तक लाया गया...लेकिन जिंदगी की जंग लड़ते-लड़ते उसकी मौत हो गई...अब उसी हत्याकांड को लेकर सड़क से लेकर सियासी गलियारों तक संग्राम छिड़ गया है। एक तरफ मृतक के परिवार का दर्द और आरोपियों को फांसी देने की मांग है...तो दूसरी तरफ निषाद पार्टी के अध्यक्ष और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद खुद मोर्चे पर उतर आए हैं। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती...क्योंकि इस पूरे मामले में समाजवादी पार्टी भी कूद पड़ी है। क्या है पूरा मामला, आइए समझते हैं।

दरअसल, गोंडा के परसपुर थाना क्षेत्र के रेकसड़िया गांव के रहने वाले विनोद कुमार साहनी शाहपुर बाजार में अपनी बर्तन की दुकान चलाते थे। बुधवार की शाम जब वह अपनी दुकान बंद करके बाइक से अपने घर लौट रहे थे, तो मौत घात लगाए बैठी थी। लल्लन यादव की दुकान के पास पहले से घात लगाए बैठे 10 हमलावरों, जिनमें मुख्य आरोपी शुभम सिंह उर्फ गोलू, सुभाष सिंह और आकाश सिंह शामिल थे, उन्होंने उनकी बाइक रोक ली। इससे पहले कि विनोद कुछ समझ पाते, बेरहम हमलावरों ने उन पर भाले और धारदार हथियारों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमलावर उन्हें मरा हुआ समझकर मौके से फरार हो गए। गंभीर हालत में विनोद को पहले परसपुर सीएचसी, फिर गोंडा मेडिकल कॉलेज और बाद में लखनऊ के केजीएमयू रेफर किया गया। लेकिन जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे विनोद साहनी ने गुरुवार तड़के इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि पीड़ित और आरोपियों के बीच सोशल मीडिया पर हुई किसी पोस्ट को लेकर रंजिश चल रही थी, जो इस खूनी अंजाम की वजह बनी।

वहीं विनोद साहनी की मौत की खबर मिलते ही यूपी की राजनीति में भूचाल आ गया। केजीएमयू के बाहर भारी हंगामा हुआ। उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद सीधे अस्पताल पहुंचे और पीड़ित परिवार से मिलकर इंसाफ की हुंकार भरी। उनके साथ बिहार के पूर्व मंत्री और वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी तथा सपा पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष राजपाल कश्यप भी धरने पर बैठ गए। नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं ने परसपुर थाना प्रभारी, शाहपुर चौकी प्रभारी और संबंधित पुलिसकर्मियों को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की। दबाव ऐसा बना कि पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया और लापरवाही बरतने के आरोप में थानाध्यक्ष कमल शंकर चतुर्वेदी, चौकी प्रभारी अंकित सिंह और बीट आरक्षी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। 

वहीं पुलिस ने मुख्य आरोपियों समेत तीन लोगों को दबोच लिया है, जबकि बाकी की तलाश में दबिश जारी है। वहीं आज शुक्रवार को जब संजय निषाद गोंडा के सर्किट हाउस पहुंचे, तो वहां का माहौल बेहद गर्म था। बाहर कार्यकर्ता पुलिस मुर्दाबाद के नारे लगा रहे थे और अंदर डीएम व एसपी के साथ बंद कमरे में मैराथन बैठक चली। परिजनों और समाज के लोगों में भारी गुस्सा है, और हर कोई आरोपियों को फांसी देने की मांग पर अड़ा है। सर्किट हाउस पहुंचते ही संजय निषाद ने भारी पुलिस तैनाती पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या निषाद समाज के लोग गुंडे-बदमाश हैं, जो इतनी बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात की गई है? 

दूसरी तरफ इस पूरे हत्याकांड ने सत्ताधारी दल के भीतर भी असहजता पैदा कर दी है, और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मौके को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अखिलेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर बिना नाम लिए कैबिनेट मंत्री संजय निषाद को एक कड़ा और सीधा सियासी संदेश दिया है। अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए लिखा कि...

"भाजपा का राज सत्ता सजातीयों के 'दंभ, घमंड, अहंकार' का आपराधिक त्रिगुट है। जो लोग समझते हैं कि सत्ता के साथ रहने से उनकी इज्जत और रुतबा बढ़ता है, वे भी अब समझ गए हैं कि भाजपा में दिखावे का पद तो मिल सकता है, लेकिन सम्मान नहीं।"

देखा जाए तो एक तरफ जहां विनोद साहनी के घर के बाहर मातम पसरा है और गांव से लेकर कलेक्ट्रेट तक भारी पुलिस बल का पहरा है, वहीं दूसरी तरफ इस मौत पर सियासत की रोटियां भी खूब सेकी जा रही हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी और पुलिसवालों के निलंबन से इस परिवार का दर्द कम हो जाएगा? क्या सोशल मीडिया की मामूली रंजिश किसी की जान ले लेगी? एक बर्तन व्यापारी की इस निर्मम हत्या ने सुरक्षा व्यवस्था के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। अब देखना यह है कि पीड़ित परिवार को इंसाफ कब मिलता है, या फिर यह मामला भी सियासत के शोरगुल में कहीं खोकर रह जाता है! 

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