श्रीराम महायज्ञ में राम व कृष्ण जन्मोत्सव की कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
गोरखपुर : खजनी क्षेत्र के ग्राम पंचायत डोड़ो के बिहारी बुजुर्ग मां काली मंदिर परिसर में चल रहे श्रीराम महायज्ञ के पांचवें दिन तथा कथा के चौथे दिन बुधवार को पंडाल में भक्ति और उल्लास का माहौल देखने को मिला। कथा वाचिका सुश्री शैल कुमारी पांडेय ने भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का भावपूर्ण वर्णन किया, वहीं कृष्ण मोहन शास्त्री महाराज ने यशोदानंदन श्रीकृष्ण के जन्म की कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। दोनों कथावाचक अयोध्या धाम से पधारे हैं
कथा के दौरान जब मंच से “भए प्रगट कृपाला दीन दयाला कौशिल्या हितकार और “हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की,, जैसे भजनों की स्वर लहरियां गूंजने लगीं तो पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु खुद को रोक नहीं पाए और भक्ति भाव में झूमते हुए नृत्य करने लगे।
सुश्री शैल कुमारी पांडेय ने श्रीराम जन्मोत्सव का वर्णन करते हुए बताया कि अयोध्या के राजा दशरथ की तीन रानियां कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा थीं, लेकिन उन्हें लंबे समय तक पुत्र प्राप्ति नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने पुत्रकामेष्टि यज्ञ कराया, जिसके फलस्वरूप भगवान विष्णु ने चार पुत्रों के रूप में अवतार लिया। कौशल्या के गर्भ से श्रीराम, कैकेयी के गर्भ से भरत तथा सुमित्रा के गर्भ से लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। भगवान राम के जन्म के समय अयोध्या में उत्सव का वातावरण छा गया, देवताओं ने पुष्प वर्षा की और राजा दशरथ ने प्रजा में दान देकर खुशी मनाई।
वहीं कृष्ण मोहन शास्त्री महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा सुनाते हुए कहा कि मथुरा के राजा कंस ने अपनी बहन देवकी और उनके पति वसुदेव को कारागार में बंद कर दिया था, क्योंकि आकाशवाणी हुई थी कि देवकी का आठवां पुत्र कंस का वध करेगा। इसी कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, जो भगवान विष्णु के आठवें अवतार माने जाते हैं। जन्म के बाद वसुदेव ने शिशु कृष्ण को गोकुल में नंद बाबा और यशोदा के पास पहुंचाया, जहां उनका पालन-पोषण हुआ।
कथा के दौरान भगवान राम और श्रीकृष्ण के जन्म प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पूरा पंडाल भक्ति रस में डूबा नजर आया।
रिपोर्टर : कृष्णमोहन सैनी
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