जहाँ सरलता ही वैभव है, और विनम्रता ही दिव्यता..... यही हैं — श्री राधारमण लाल जू के गोसाईं

वृन्दावन की रमणियां गलियों में, जहाँ हर साँस में श्री राधारमण लाल की जय गूँजता है — वहीं माधवगौड़िया-सम्प्रदाय है, जो दिखने में भले साधारण लगे, परंतु जिनकी आत्मा में दिव्यता का प्रकाश झिलमिलाता है। ये हैं — श्री राधारमण लाल जू के गोसाईं।

रेशम की धोती, शांत मुस्कान, और नेत्रों में झलकती श्री राधारमण जू की प्रेमाभक्ति।

पर सेवा? सेवा कठिन है....

इतनी कठिन कि हर कोई इसे निभा नहीं सकता। क्योंकि यहाँ सेवा कर्म नहीं — सम्पूर्ण समर्पण है। श्री राधारमण जू की सेवा में नियम अपनी पराकाष्ठा पर हैं — समय, विधि, परम्परा, हर क्षण अनुशासन से बंधा हुआ। हर शृंगार, हर भोग, हर आरती — जैसी स्वयं श्री गोपाल भट्ट गोसाईं  जी ने निर्धारित की थी। कम नींद, अल्प विश्राम, पर मन में कोई थकान नहीं। क्योंकि इनके लिए— यह सेवा नहीं, सौभाग्य है।

सरल हृदय और उदार भाव —

उनसे मिलिए तो लगता है — जैसे किसी परिचित, सहज, सामान्य इंसान से बात हो रही है। लेकिन एक पल को रुकिए… और समझिए — ये साधारण पुजारी नहीं, ये आचार्य हैं। इनकी विनम्रता भ्रम पैदा कर सकती है — पर सत्य यह है कि इनका प्रत्येक कर्म राधारमण जू की आज्ञानुसार चलता है। उदारता ऐसी कि हर भक्त को मुस्कान मिलती है, सरलता ऐसी कि कोई दूरी महसूस नहीं होती, और प्रेम ऐसा कि हर क्षण हर किसी की सेवा को तत्पर। परम्परा के अनुसार — सेवक का चुनाव स्वयं श्री राधारमण जू ही करते हैं।

श्री राधारमण लाल जू जिन्हें अपनी सेवा में स्थान देना चाहते हैं, उन्हीं के घर में सेवा की परम्परा पनपती है।

ये गोसाईं सिर्फ पीढ़ियों से  नहीं — सदा से ठाकुर जी के हैं।

ये गोसाईं जन मात्र मनुष्य नहीं, गुणमञ्जरी के अवतरण हैं, श्री राधा-कृष्ण की निकट लीला के सहभागी, और धरती पर उतरे दिव्यांश हैं।

उनकी शांति, उनकी दृष्टि, उनकी सेवा — सबमें लीला की झलक मिलती है।

वृन्दावन में दिव्यता दिखती नहीं, महसूस होती है। कभी सुबह 4 बजे की मंगला आरती में, कभी रसोई में बनते नैवेद्य की सुगंध में, कभी गोसाईं जनों की सधी हुई, मधुर वाणी में। और तब समझ आता है — वृन्दावन में चमत्कार शोर से नहीं, सादगी से होते हैं।

जब भी आपको श्री राधारमण जी के गोसाईं जन दिख जाएँ — तो केवल सिर ही नहीं मन को भी झुकाइए, क्योंकि वहाँ आप सिर्फ़ एक इंसान नहीं, श्री राधारमण द्वारा चुने गए उनके निज सेवायत के दर्शन कर रहे हैं।

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