उत्तर प्रदेश: ग्रामीण संपत्तियों को मिलेगी कानूनी पहचान, योगी सरकार ने विधानसभा में पेश किए 11 अहम विधेयक
BY-PRAKHAR SHUKLA
उत्तर प्रदेश: ग्रामीण संपत्तियों को मिलेगी कानूनी पहचान, योगी सरकार ने विधानसभा में पेश किए 11 अहम विधेयक-
घरौनी को कानूनी मान्यता: ग्रामीणों के मालिकाना हक पर बड़ा फैसला-
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने विधानमंडल के शीतकालीन सत्र में 'उत्तर प्रदेश ग्रामीण आबादी अभिलेख विधेयक-2025' पेश कर एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। इस विधेयक के माध्यम से अब 'घरौनी' (स्वामित्व प्रमाण पत्र) को आधिकारिक कानूनी दस्तावेज की मान्यता मिल जाएगी। अब तक स्वामित्व योजना के तहत जारी यह दस्तावेज केवल एक रिकॉर्ड मात्र था, लेकिन कानूनी दर्जा मिलने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति से जुड़े विवादों में प्रभावी कमी आएगी और ग्रामीणों का अपनी जमीन पर अधिकार और मजबूत होगा।
वरासत और नामांतरण की प्रक्रिया होगी आसान-
इस नए कानून के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में वरासत (उत्तराधिकार), संपत्ति की बिक्री और नामांतरण (नाम चढ़वाने) की प्रक्रिया बेहद सरल हो जाएगी। विधेयक में लिपिकीय त्रुटियों (Clerical errors) को ठीक करने का स्पष्ट प्रावधान किया गया है। साथ ही, अब घरौनी के दस्तावेजों पर मकान नंबर और मालिक का फोन नंबर भी दर्ज किया जा सकेगा। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीणों को अपनी संपत्ति पर बैंक से लोन लेने में भी काफी आसानी होगी।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और व्यापार नियमों में संशोधन-
राज्य में निवेश और व्यापार को सुगम बनाने के लिए सरकार ने 'उत्तर प्रदेश सुगम्य व्यापार विधेयक-2025' और 'दुकान एवं वाणिज्य अधिष्ठान संशोधन विधेयक' भी पेश किए हैं। नए नियमों के तहत बैंक, मीडिया, अस्पताल और आईटी जैसी सेवाओं को भी दायरे में लाया गया है। 20 से अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि व्यापारियों को मामूली तकनीकी गलतियों पर अब आपराधिक दंड से मुक्ति दी गई है, जिससे व्यापार करना और अधिक व्यावहारिक होगा।
शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य महत्वपूर्ण विधायी बदलाव-
सामाजिक समावेश के लिए 'केजीएमयू संशोधन विधेयक' लाया गया है, जिससे विश्वविद्यालय की कार्य परिषद में SC/ST और OBC वर्ग के प्रोफेसरों को प्रतिनिधित्व मिल सकेगा। इसके अलावा, शिक्षा व्यवस्था में सुधार हेतु निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक और पुराने हो चुके गन्ना उपकर अधिनियम को निरस्त करने के प्रस्ताव भी रखे गए। विधानसभा के प्रमुख सचिव ने सदन को उन 11 अधिनियमों की भी जानकारी दी जो अब कानून का रूप ले चुके हैं, जिनमें बांके बिहारी जी मंदिर न्यास और लोक सेवा आयोग से संबंधित महत्वपूर्ण कानून शामिल हैं।
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