यूनिवर्सिटी कर्मचारियों का हल्लाबोल, DM मेधा रूपम ने एजेंसियों को दी चेतावनी
ग्रेटर नोएडा की सड़कों पर इन दिनों नारों की गूँज है। एक तरफ वो कर्मचारी हैं जो दिन-रात मेहनत करते हैं, और दूसरी तरफ वो मैनेजमेंट जो सरकारी आदेशों को ताक पर रखकर बैठा है। जहाँ छात्र अपना भविष्य बनाने आते हैं, उसी यूनिवर्सिटी के कर्मचारी आज अपने वर्तमान के लिए सड़क पर उतर आए हैं। जी हां मजदूरों के बाद नोएडा में वेतन वृद्धि और ओवरटाइम के बकाया भुगतान को लेकर कर्मचारियों ने यूनिवर्सिटी कैंपस के बाहर डेरा डाल दिया है।
माहौल इतना गरमा गया है कि पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा है। लेकिन खबर सिर्फ प्रदर्शन की नहीं है, खबर डीएम मेधा रूपम के उस हंटर की भी है जिसने अब उन एजेंसियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं जो श्रमिकों का हक मार रही हैं। जी हां डीएम मेधा रूपम ने साफ कर दिया है कि अगर मजदूरों का हक मारा गया, तो बीच का रास्ता नहीं, बल्कि सीधे ब्लैकलिस्ट का रास्ता खुलेगा। वहीं यूनिवर्सिटी के बाहर कर्मचारियों का उग्र प्रदर्शन लगातार जारी है। कर्मचारियों का आरोप सीधा और गंभीर है कि उनसे गधे की तरह ओवरटाइम कराया जाता है, लेकिन जब पैसे देने की बात आती है, तो मैनेजमेंट चुप्पी साध लेता है। कर्मचारियों की साफ़ मांग है कि सैलरी में सम्मानजनक बढ़ोतरी की जाए और ओवरटाइम का भुगतान दोगुना किया जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री की हाई पावर कमेटी पहले ही वेतन बढ़ाने का आदेश दे चुकी है, लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन इन आदेशों को कूड़ेदान में डाल चुका है।
आपको बता दें मैनेजमेंट ने अभी तक इस आग को बुझाने के लिए कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। ऐसे में नोएडा में बढ़ते उपद्रव और श्रमिकों के गुस्से को देखते हुए जिलाधिकारी मेधा रूपम ने अब मोर्चा खुद संभाल लिया है। उन्होंने संविदाकारों और आउटसोर्सिंग एजेंसियों के साथ एक हाई-लेवल मीटिंग की और साफ़ शब्दों में डेथ वारंट जारी कर दिया है। डीएम के सख्त निर्देश हैं कि अगर किसी एजेंसी ने श्रमिकों को उनका हक नहीं दिया या उनके व्यवहार के कारण उपद्रव हुआ, तो उस एजेंसी को तुरंत ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा और लाइसेंस रद्द होगा।
डीएम ने साफ़ कर दिया है कि सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन से एक रुपया भी कम नहीं चलेगा। सारा भुगतान चेक या बैंक ट्रांसफर के जरिए होगा, कैश के नाम पर कोई खेल नहीं चलेगा। फिलहाल यूनिवर्सिटी के बाहर स्थिति को काबू में रखने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस की भारी तैनाती की गई है। पुलिस अधिकारी दोनों पक्षों के बीच मिडिएटर बनने की कोशिश कर रहे हैं। देखा जाए तो ग्रेटर नोएडा का यह प्रदर्शन अब सिर्फ एक यूनिवर्सिटी का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे जिले की आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान है। डीएम मेधा रूपम के सख्त तेवरों ने साफ कर दिया है कि अब जुगाड़ से काम नहीं चलेगा, नियमों का पालन करना ही होगा। ऐसे में यूनिवर्सिटी प्रशासन के लिए अब चुनौती बढ़ गई है कि या तो वे कर्मचारियों की मांगें मानें, या फिर प्रशासन की कड़ी कार्रवाई का सामना करें।

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