सूखे में किसानों के लिए मूंगफली की खेती बन सकती है विकल्प, जानें 4 उन्नत किस्में और पैदावार


सूखे की आशंका के बीच किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसी फसल चुनने की है, जो सीमित पानी में भी अच्छी पैदावार दे सके। ऐसे में मूंगफली की खेती एक विकल्प हो सकती है। हालांकि, इसकी सफलता मिट्टी, बारिश, बुवाई के समय, सिंचाई की उपलब्धता और किस्म के चयन पर निर्भर करती है। किसान अपने क्षेत्र की जलवायु के अनुसार उपयुक्त किस्म चुनकर बेहतर उत्पादन की कोशिश कर सकते हैं।

आरजी-425 और जीजी-2: उत्पादन क्षमता वाली किस्में

आरजी-425 किस्म लगभग 120 से 125 दिनों में तैयार होती है और इसकी पैदावार 18 से 36 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक बताई जाती है। इसे सूखे और कॉलर रॉट रोग को सहन करने वाली किस्म माना जाता है। वहीं, जीजी-2 भी करीब 120 से 125 दिनों में पकती है और इससे 25 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज मिलने का दावा किया जाता है। इसकी बढ़वार छोटे पौधे और गुच्छे के रूप में होती है। बुवाई से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से किस्म की उपयुक्तता की पुष्टि करना जरूरी है।

एचएनजी-69 और जीजी-7 से भी मिल सकती है अच्छी उपज

एचएनजी-69 किस्म लगभग 125 दिनों में तैयार होती है और इससे 25 से 28 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार मिलने की संभावना बताई जाती है। इसे कॉलर रॉट, तना गलन और शुरुआती धब्बा रोग के प्रति प्रतिरोधी बताया गया है। दूसरी ओर, जीजी-7 अपेक्षाकृत कम समय में तैयार होने वाली किस्म है, जिसे पकने में करीब 90 से 105 दिन लगते हैं। इसकी संभावित उपज 21 से 29 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई जाती है। राजस्थान की परिस्थितियों में इसकी खेती को उपयुक्त माना जाता है, लेकिन अंतिम चुनाव स्थानीय मौसम और कृषि सलाह के आधार पर करें।

खेत की तैयारी और मिट्टी का रखें ध्यान

मूंगफली की खेती के लिए भुरभुरी दोमट या बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त रहती है, जिसमें पानी का जमाव न हो। खेत तैयार करने के लिए पहले मिट्टी पलटने वाले हल से जुताई करें। इसके बाद कल्टीवेटर चलाकर मिट्टी को भुरभुरा बनाएं और पाटा लगाकर खेत समतल कर लें। अच्छी जल निकासी से फसल को नुकसान का खतरा कम करने में मदद मिलती है। सूखे वाले क्षेत्रों में बुवाई से पहले बारिश की संभावना, मिट्टी में नमी और उपलब्ध सिंचाई का आकलन करना भी जरूरी है।

बीज की मात्रा और बुवाई से पहले जरूरी सावधानियां

कम फैलने वाली मूंगफली की किस्मों के लिए प्रति हेक्टेयर लगभग 75 से 80 किलोग्राम बीज, जबकि अधिक फैलने वाली किस्मों के लिए 60 से 70 किलोग्राम बीज की जरूरत बताई जाती है। बुवाई से 10 से 15 दिन पहले स्वस्थ फलियों से दाने निकालकर बीज तैयार कर लें। बीज की मात्रा किस्म, दानों के आकार और बुवाई की विधि के अनुसार बदल सकती है। इसलिए स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से सलाह लेकर ही बीज और बुवाई का समय तय करें। ध्यान रखें कि बताई गई पैदावार संभावित है; वास्तविक उत्पादन मौसम, मिट्टी, नमी और फसल प्रबंधन पर निर्भर करेगा।

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