"आसान पैसे" का सपना कहीं आपकी सबसे बड़ी भूल न बन जाए
राजकोट : मैं ऑफिस में लंच करने बैठा था और बात निकली एक सहकर्मी ने बताया की मेरी पहचान वाला लड़का गायब हे और कोई ऑनलाइन गेम में उसने 19 लाख रुपए चले गए। यह बात वहीं खत्म नहीं हुई जैसे ही बात निकली साथ में बैठे 6 में से 4 सह कर्मियों ने ऐसी घटना का जिक्र किया और उसमें से एक अपने खुद के 8000 रुपए खो के वही से अटक गया। और बहार निकल के सभी कर्मी को बताया और 1 सप्ताह में लिस्ट बनाने को कहा तो सिर्फ 12 कर्मियों के जान पहचान वाले 48 से ज्यादा लोग निकले जिसने ऑनलाइन ड्रॉ और गेम में पैसे गवाए हो किसीको कुछ नहीं मिला?!
आज मोबाइल पर हजारों ऑनलाइन गेम, लकी ड्रॉ, कैसीनो और इनाम देने वाले प्लेटफ़ॉर्म दिखाई देते हैं। आकर्षक विज्ञापन, बड़े-बड़े जैकपॉट, कुछ ही मिनटों में पैसा दोगुना होने के दावे और सोशल मीडिया पर जीत की कहानियाँ लोगों को अपनी ओर खींचती हैं।
लेकिन एक सवाल ज़रूर पूछिए—
*क्या जो हमें स्क्रीन पर दिखाई देता है, वही पूरी सच्चाई भी होती है? या स्क्रिप्टेड*
सिर्फ़ एनिमेशन देखकर भरोसा क्यों नहीं करना चाहिए?!
जब कोई ऑनलाइन ड्रॉ या गेम चलता है, तो हमें घूमते हुए नंबर, चमकदार ग्राफिक्स, काउंटडाउन और विजेता घोषित होते दिखाई देते हैं। लेकिन केवल यह दृश्य देखकर यह साबित नहीं होता कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष है। यदि किसी डिजिटल सिस्टम की कार्यप्रणाली सार्वजनिक नहीं है, उसका स्वतंत्र ऑडिट नहीं होता या उसकी निष्पक्षता की स्वतंत्र रूप से जाँच नहीं की जा सकती, तो केवल स्क्रीन पर दिख रही प्रक्रिया भरोसे का पर्याप्त आधार नहीं बनती।
मैंने एक शैक्षणिक डेमो बनाया?जिसमें नंबर पहले से तय हो और वहीं परिणाम लाइव दिखे
इस विषय को समझाने के लिए मैंने एक *शैक्षणिक डेमो* तैयार किया।उस डेमो में शुरुआत से ही स्पष्ट लिखा गया था कि परिणाम *पहले से तय* हैं और यह केवल शिक्षा के उद्देश्य से बनाया गया है।
उसका उद्देश्य किसी गेम, ऐप या कंपनी पर आरोप लगाना नहीं था।
उसका उद्देश्य केवल यह दिखाना था कि:यदि कोई प्रणाली पारदर्शी न हो, तो केवल आकर्षक एनिमेशन देखकर उसकी निष्पक्षता सिद्ध नहीं की जा सकती।
उसमें सब चीजें स्क्रिप्टेड हो जाती हे या कर सकते हे जो आपको लाइव दिखेगा। अगर कोई ड्रॉ की बात करे तो उसके पीछे की स्क्रिप्ट में सिर्फ