गुनाहों का देवता , दर्द भरी प्रेमगाथा

देश की सबसे दर्द भरी कहानी गुनाहों का देवता जिसे धर्मवीर भारती ने लिखा है , यह धर्मवीर भारती के सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले उपन्यासों में से एक है ये अपन्यास जहां प्रेम के असल सरल भाव को दर्शाया गया है , जहां प्रेम किसी को बांधना या उसकी चाहत नही है बल्कि एक भक्ति भावना है , जिसका अलौकिक रूप का अन्यतम चित्रण है इस उपन्यास में .
प्रेम की सबसे दर्द और दुख भरी कहानी गुनाहो का देवता जिसके रचनाकार है धर्मवीर भारती ये उपन्यास प्रेम और करूणा का वो सागर है , जिसको पढ़ने वाला पाठक इसमें सदैव के लिए डूब जाता है , और ऐसा इसलिए भी है क्योंकि इसका लेखन भी उतने ही सुंदर भाव से किया गया है , जहां सेक्सुअल टच तो है, पर वल्गैरिटी कहीं नहीं है, उसमें सिहरन तो है, लेकिन यह पाठकों को उत्तेजित नहीं करता। लेखक खुद इस उपन्यास के कितने नजदीक हैं, इसका अंदाजा इस उपन्यास के कुछ कथनो से ही लगाया जा सकता है , ये कहानी चार पात्रों के इर्द गिर्द घूमती है जिनके नाम है ,चंदर सुधा , बिनती, पम्मी इनके सार्गिद्ध ही ये कहानी समी हुई है ,इस उपन्यास को छपे हुए भलें ही 60 साल हो चुकें हो लेकिन इसकी कहानी आज भी युवाओं के बीच अंगारा भर देती है , अंगारा प्रेम का प्रेम में सर्मपित भक्ति का , गुनाहों का देवता जो स्नेह और प्रेम जब अपनी पराकाष्ठा पर पहुँचने लगे तो उसका त्याग करने का गुनाह की कहानी पर आधारित है , प्रेम में सर्मपित दो लोगों की कहानी पर आधारित है , जहां दो लोग जो एक दूसरे से उतना प्रेम करते है, जितना एक शिशु अपनी मां से करता है , लेकिन एक दूसरे की खुशी के लिए सलामती के लिए एक दूसरें को त्यागने को भी तैयार है , जुदाई के कष्ट को सहने को तैयार है , जहां दो लोगों के शरीर तो एक दूसरे से जरूर अलग है लेकिन अंतरआत्माएं मानों एक दूसरे में समाई हुई हो , पवित्रता तो मानो ऐसी की गंगा भी आगे फीकी रह जाएं , एक लड़की सुधा जो बचपन से लेकर जवानी तक केवल दो लोगों के ईर्द घूमी हो एक उसके पिता और एक वो लड़की जिससे वो लीन प्यार करती है , और जिसके कहने पर वो सागर से लड़ने को तैयार हो जाए , लेकिन ये प्यार ऐसा जैसे मानों कोई जोगिन परमात्मा की भक्ति में लीन , एक लड़का चंदर को अपने पिता समान गुरू का ऋृणी है , और जिनकी सुकन्या से वो बच्चें की तरह प्यार करता है , लेकिन गंगा समान पवित्रता और अपने पिता सामान गुरू का ऋृणी होने के कारण प्यार को अपनाना नही चाहता , इस प्रेम में तन के खिंचाव से ज्यादा मन का लगाव था. चन्दर सुधा का देवता था और सुधा ने हमेशा एक भक्त की तरह ही उसे सम्मान दिया था. प्रेम को लेकर चंदर का द्वंद्व पूरे उपन्यास में इस कदर हावी है कि सुधा की शादी कहीं और हो जाती है, और अंत में वे पूरे जीवन दर्द भोगते हैं. लेकिन कहानी का एक और पात्र पम्मी इस कहानी का त्रिकोण है. वह एक एंग्लोइंडियन लेडी है, जो तलाक के बाद चंदर की तरफ खिंचती है. उसे चंदर और सुधा के प्यार का पता है. साथ ही एक बिनती जो सुधा की बहन है , जो दिवानी जोगिन बन जाती है चंदर की जिसे चंदर मिल तो जाता है , लेकिन वो चंदर जो टूट चुका होता है जो पम्मी और सुधा के हिस्से में बंटने के बाद बचा एक लोथड़ा सा है , जिसमें न तो जान होती है न ही कोई भावना .
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