CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर देशभर में कांग्रेस का प्रदर्शन
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस ने शुक्रवार, 25 सितंबर को देशभर में प्रदर्शन किया। दिल्ली, लखनऊ, देहरादून, पटना, शिमला, जम्मू, कोलकाता और चंडीगढ़ समेत कई शहरों में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे। कई जगह प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। पटना और चंडीगढ़ में प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का भी इस्तेमाल किया गया।
कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार मनमाने तरीके से फैसले ले रहे हैं और दो अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया। यह आरोप द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की रिपोर्ट के बाद और तेज हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की थी। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अलग-अलग राय और टिप्पणियां किसी भी संस्था की निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं और पिछले एक साल में आयोग के सभी फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
दिल्ली में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पार्टी मुख्यालय से चुनाव आयोग की ओर मार्च करने की कोशिश की। पंडित दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने का प्रयास किया, जिसके बाद पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। लखनऊ में भारी बारिश के बीच कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। देहरादून में प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पर चढ़ गए। पटना में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
असम में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई के नेतृत्व में राजीव भवन से मार्च निकाला गया। प्रदर्शनकारी मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें बैरिकेड लगाकर रोक दिया। बैरिकेड पार करने की कोशिश के बाद गौरव गोगोई समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया।
चंडीगढ़ में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग कार्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश की। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोका। इसके बाद धक्कामुक्की की स्थिति बनी और पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा, सांसद दीपेंद्र हुड्डा समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई।
विवाद का एक बड़ा केंद्र चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR प्रक्रिया है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, SIR के तहत 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से ज्यादा नाम प्रभावित हुए हैं। रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने और चुनावी डेटा से जुड़े सिस्टम के केंद्रीकरण को लेकर आपत्तियां दर्ज किए जाने का उल्लेख है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि SIR के जरिए बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं और इस पूरी प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए।
SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल की गई है। 25 सितंबर को दायर याचिका में SIR से जुड़े फैसलों, दिशानिर्देशों और कथित सॉफ्टवेयर बदलावों को चुनौती देते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की गई है। वहीं, जंतर-मंतर पर भी SIR के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन की तैयारी के बीच पुलिस ने बैरिकेडिंग और भारी पुलिस बल तैनात किया। प्रदर्शन से जुड़े कई लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है।
कांग्रेस लगातार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर उठे सवाल लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़े गंभीर मुद्दे हैं। इस बीच विपक्ष की ओर से संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने की बात भी सामने आई है। पूरे विवाद के बीच एक तरफ कांग्रेस और विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग ने कहा है कि रिपोर्ट में कुछ आंतरिक टिप्पणियों को व्यापक निर्णय प्रक्रिया से अलग करके देखा गया है और आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

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