विष्णुगढ़ प्रखंड के सिमरिया मध्य विद्यालय में सिर्फ दो शिक्षक, कक्षा 1 से 8 तक की पढ़ाई प्रभावित

विष्णुगढ़ (हजारीबाग) : शिक्षा को विकास की नींव माना जाता है, लेकिन झारखंड के ग्रामीण इलाकों में सरकारी विद्यालयों की स्थिति गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। विष्णुगढ़ प्रखंड अंतर्गत सिमरिया स्थित राजकीय कृत उत्क्रमित मध्य विद्यालय में कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाई होती है, परंतु विद्यालय में मात्र दो शिक्षक पदस्थापित हैं। ऐसे में सैकड़ों छात्र-छात्राओं का शैक्षणिक भविष्य अधर में लटका हुआ है।
आठ कक्षाएं, दो शिक्षक — कैसे होगी गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई?
विद्यालय में नामांकित बच्चों की संख्या अच्छी-खासी बताई जाती है, लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण एक ही शिक्षक को कई कक्षाओं को एक साथ संभालना पड़ता है। मल्टी-ग्रेड शिक्षण व्यवस्था में न तो हर कक्षा को पूरा समय मिल पाता है और न ही विषयवार पढ़ाई संभव हो पाती है। परिणामस्वरूप बच्चों की बुनियादी शिक्षा—पढ़ना, लिखना और गणित—कमजोर हो रही है।
गरीब परिवारों के बच्चों पर सीधा असर
सरकारी विद्यालयों में अधिकतर गरीब एवं असहाय परिवारों के बच्चे शिक्षा प्राप्त करते हैं। निजी विद्यालयों में पढ़ाने की आर्थिक क्षमता न होने के कारण वे पूरी तरह सरकारी व्यवस्था पर निर्भर हैं। शिक्षकों की कमी के कारण इन्हीं बच्चों का भविष्य सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है।
मिड-डे मील से नहीं बनता भविष्य
विद्यालय में मध्याह्न भोजन योजना संचालित है, जो बच्चों के पोषण के लिए आवश्यक है। लेकिन अभिभावकों का कहना है कि सिर्फ भोजन से शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं की जा सकती। बच्चे विद्यालय पढ़ने आते हैं, केवल भोजन के लिए नहीं। यदि कक्षाओं में पर्याप्त शिक्षक नहीं होंगे तो शिक्षा का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।
पूरे प्रखंड में समान स्थिति
स्थानीय लोगों का कहना है कि विष्णुगढ़ प्रखंड के कई सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी है। कहीं कक्षाएं अधिक हैं तो शिक्षक कम, तो कहीं विषय विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं। इससे शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहा है।

अभिभावकों और ग्रामीणों ने सरकार से अविलंब शिक्षक नियुक्ति की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई तो बच्चों का शैक्षणिक स्तर और गिर जाएगा, जिसका असर आने वाले वर्षों में दिखाई देगा।
प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन से इस ओर तत्काल ध्यान देने की अपील की है। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

झारखंड में शिक्षा के विकास की बात अक्सर होती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। विष्णुगढ़ के सिमरिया विद्यालय की स्थिति यह दर्शाती है कि जब तक शिक्षकों की पर्याप्त नियुक्ति और निगरानी व्यवस्था मजबूत नहीं होगी, तब तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का सपना अधूरा ही रहेगा।

रिपोर्टर : संदीप मिश्रा

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