दानुआ घाटी बनी 'डेथ वैली': भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के 6 लोगों की मौत,NHAI की लापरवाही पर उठे सवाल

चौपारण : हजारीबाग जिले की दानुआ घाटी शनिवार की रात एक बार फिर निर्दोषों के खून से लाल हो गई। हाल के वर्षों की सबसे वीभत्स दुर्घटनाओं में से एक में, एक ही परिवार के छह सदस्यों की जीवन लीला समाप्त हो गई। मृतकों में दो पुरुष, एक महिला और तीन मासूम बच्चे शामिल हैं। टक्कर इतनी जोरदार थी कि वाहन पूरी तरह लोहे के मलबे में तब्दील हो गया।

शादी की खुशियाँ मातम में बदलीं
मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित परिवार धनबाद से बोधगया एक शादी समारोह में शामिल होने जा रहा था। उनका पैतृक निवास गया जिले के आमस में बताया जा रहा है, जबकि परिवार के सदस्य धनबाद में कार्यरत थे। रात के अंधेरे में दानुआ घाटी में उनकी गाड़ी काल का ग्रास बन गई। शवों की स्थिति इतनी हृदयविदारक थी कि प्रशासन को कटर और अन्य भारी मशीनों का उपयोग कर वाहन को काटकर उन्हें बाहर निकालना पड़ा।
NHAI और निर्माण कंपनी पर गंभीर आरोप
घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य में जुटे आपदा मित्र शक्ति कुमार चंदवानी ने व्यवस्था पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। अब तक 500 से अधिक शवों को अपने हाथों से एम्बुलेंस तक पहुँचा चुके चंदवानी ने इस नरसंहार का जिम्मेदार सीधे तौर पर NHAI (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) और सड़क निर्माण कंपनी को ठहराया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क का कार्य उतना अच्छा नहीं हुआ है। कई जगह गढ्ढे और रोड ऊंचा निचा है जिससे भी गाड़ी अनियंत्रित हो जाती है।
उन्होंने कहा, "यह इलाका डेंजर जोन घोषित होने के बावजूद यहाँ न तो सड़क का चौड़ीकरण किया गया है, न ही पर्याप्त लाइटिंग और साइन बोर्ड की व्यवस्था है। हर मौत के बाद प्रशासन गहरी नींद में सो जाता है।"
प्रशासनिक सुस्ती और स्थानीय वीर
दुर्घटना के बाद एक बार फिर सरकारी तंत्र की पोल खुल गई। जहाँ सरकारी एम्बुलेंस सेवाओं में देरी की बात सामने आई, वहीं शक्ति कुमार चंदवानी जैसे स्थानीय लोग देवदूत बनकर मौके पर डटे रहे। फिलहाल पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर शिनाख्त की प्रक्रिया तेज कर दी है और संबंधित परिजनों को सूचित करने का प्रयास किया जा रहा है।
यह दुर्घटना महज़ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उन सरकारी खामियों का परिणाम है जो विकास के नाम पर लोगों की जान से खिलवाड़ कर रही हैं। आखिर इन मासूमों की मौत का हिसाब कौन देगा?

रिपोर्टर : राहुल राणा 

 

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