चौपारण में आठ घंटे का भीषण महाजाम, महुदी मोड़ से चौपारण तक रेंगते रहे वाहन; एंबुलेंस भी फंसी
चौपारण - हजारीबाग चौपारण में रविवार को लगे भीषण जाम ने आम जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया। सुबह करीब 10 बजे शुरू हुआ जाम लगभग आठ घंटे तक लोगों के लिए भारी परेशानी का सबब बना रहा। महुदी मोड़ से चौपारण तक जीटी रोड पर छोटे-बड़े वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। वाहन घंटों रेंगते रहे और जाम में फंसे लोग सड़क पर परेशान नजर आए। जानकारी के अनुसार, जाम की प्रमुख वजह वाहनों का रॉन्ग साइड से निकलना और आगे निकलने की होड़ रही। जाम लगते ही कई वाहन चालक गलत दिशा में घुस गए। एक-दूसरे से आगे निकलने और जबरन रास्ता बनाने के प्रयास में दोनों दिशाओं से आने वाले वाहन आमने-सामने फंसते चले गए। देखते ही देखते यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।
महुदी मोड़ से शुरू हुआ जाम धीरे-धीरे चौपारण की ओर बढ़ता गया। ट्रक, बस, चारपहिया और छोटे वाहनों के साथ बड़ी संख्या में यात्री घंटों जाम में फंसे रहे। जाम के कारण लोगों के जरूरी काम प्रभावित हुए और यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक एंबुलेंस भी जाम में फंसी नजर आई। आपात स्थिति में मरीज को लेकर गुजरने वाली एंबुलेंस का घंटों तक जाम में फंसना यातायात व्यवस्था और सड़क प्रबंधन की गंभीर स्थिति को उजागर करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि महुदी मोड़, चतरा मोड़, पेट्रोल पंप क्षेत्र और चौपारण बाजार में जाम की समस्या लगातार बनी रहती है। इसके बावजूद अब तक कोई प्रभावी और स्थायी यातायात व्यवस्था विकसित नहीं की जा सकी है। लोगों ने रॉन्ग साइड चलने वाले वाहन चालकों पर सख्त कार्रवाई करने, प्रमुख जाम प्वाइंटों पर नियमित रूप से पुलिस बल की तैनाती तथा प्रभावी ट्रैफिक मैनेजमेंट की व्यवस्था करने की मांग की है। जाम को लेकर स्थानीय लोगों में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति भी नाराजगी देखी गई। लोगों का कहना है कि जब यह समस्या बार-बार सामने आ रही है, तो इसके स्थायी समाधान के लिए ठोस पहल आखिर कब होगी।
स्थानीय नागरिकों ने सड़क व्यवस्था में सुधार, सर्विस रोड को दुरुस्त करने, आवश्यक अंडरपास एवं अन्य यातायात सुविधाओं के विकास की भी मांग की है। रविवार के करीब आठ घंटे लंबे महाजाम ने एक बार फिर चौपारण की यातायात व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर ठोस और स्थायी कार्रवाई की जरूरत है, ताकि भविष्य में आम लोगों को इस तरह के भीषण जाम से राहत मिल सके।
रिपोर्टर - अमित सिंह
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