क्रेन भी नहीं हिला पाई 8 फीट की हनुमान प्रतिमा! उज्जैन में मचा हड़कंप
जहां मशीनों की ताकत थम गई...वहां आस्था की ताकत नजर आई, जिसे हटाने की कोशिश हुई...वही खड़े हनुमान अपनी जगह अडिग खड़े रहे। जी हां धर्म और अध्यात्म की पावन नगरी उज्जैन में इन दिनों एक ऐसा अलौकिक दृश्य देखने को मिल रहा है, जिसने आम श्रद्धालुओं से लेकर प्रशासनिक अमले और तकनीकी विशेषज्ञों तक को हैरान कर दिया है!
दरअसल, सिंहस्थ 2028 के भव्य आयोजन के लिए कंठाल चौराहे से छत्री चौक मार्ग के चौड़ीकरण का काम चल रहा था। इसी रास्ते में करीब 170 साल पुराना ऐतिहासिक 'खड़े हनुमान मंदिर' आ रहा था। प्रशासन ने नियम-कायदों के तहत मंदिर की दीवारें और गुंबद हटा दिए और 8 फीट ऊंची दिव्य हनुमान प्रतिमा को सुरक्षित दूसरे स्थान पर शिफ्ट करने की तैयारी की। भारी-भरकम क्रेनें आईं, इंदौर-उज्जैन के बड़े-बड़े इंजीनियर जुटे, छेनी-हथौड़े से लेकर अत्याधुनिक मशीनें लगा दी गईं...लेकिन संकटमोचन हनुमान जी अपनी जगह से टस से मस नहीं हुए! जब हर आधुनिक तकनीक नाकाम साबित हुई, तो अवंतिका नगरी में गूंज उठा कि "यह कोई महज इत्तेफाक नहीं, बल्कि पवनपुत्र की साक्षात शक्ति और उनकी मर्जी का दिव्य चमत्कार है!"
फिलहाल प्रतिमा वहीं है...बस अब उसके ऊपर टेंट की छत है। मंदिर में भजन हो रहे हैं...हनुमान चालीसा का पाठ हो रहा है...महाआरती हो रही है...और भक्तों की लंबी कतारें लगी हैं। आपको बता दें जैसे-जैसे प्रतिमा को हटाने की कोशिशें नाकाम होती गईं, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती गई। लोग बाबा के दर्शन के लिए पहुंचने लगे। श्रद्धालुओं का कहना है कि जब इतनी कोशिशों के बाद भी हनुमान जी अपनी जगह से नहीं हिले, तो प्रशासन को एक बार फिर अपने फैसले पर विचार करना चाहिए। कई भक्त इसे बजरंगबली की इच्छा और शक्ति से जोड़कर देख रहे हैं। वहां के स्थानीय लोग आरती और हनुमान चालीसा का पाठ करके भगवान को मनाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं आज प्रशासन के बड़े अधिकारी बैंड-बाजे के साथ वहां पहुंचे और भगवान से उस स्थान से हटने की प्रार्थना करने लगे, हनुमान जी को मनाने की लाखों कोशिशे हो रही है कि वो वहां से हटकर दूसरे स्थान पर चले जाए ताकि सड़क निर्माण का काम आगे बढ़ सके।
आपको बता दें खड़े हनुमान मंदिर से उज्जैन के लोगों का जुड़ाव कोई आज का नहीं है। बताया जाता है कि ये प्रतिमा करीब 150 से 170 साल पुरानी है और सिंधिया स्टेट के समय से यहां स्थापित मानी जाती है। कहा जाता है कि यहां रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। लोग स्वास्थ्य और बीमारी से जुड़ी अपनी मान्यताओं के तहत यहां झाड़ा लगवाने भी आते हैं। यानी ये जगह सिर्फ एक मंदिर नहीं...बल्कि उज्जैन की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन चुकी है। फिलहाल प्रशासन और विशेषज्ञ अब तकनीकी पहलुओं की जांच कर रहे हैं और प्रतिमा को सुरक्षित रखने का रास्ता तलाश रहे हैं। अब देखना यही होगा कि आगे क्या होता है...क्या खड़े हनुमान जी अपनी इसी जगह पर विराजमान रहेंगे? या फिर सिंहस्थ की तैयारियों के बीच उन्हें नई जगह ले जाने का कोई सुरक्षित रास्ता निकलेगा?
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