शिव महापुराण कथा को सुनाते हुए व्यास आचार्य अंकित (वत्सल जी) ने भक्तों को चलता फिरता प्रयागराज बताया।

हरदोई : हरदोई के माधौगंज के ग्राम पंचायत दौलतयारपुर में कांवरिया कमेटी द्वारा आयोजित कथा में व्यास ने कहा कि संत समागम हरि कथा तुलसी दुर्लभ दोय अर्थात मानव जीवन में भौतिक सुख-सुविधाएँ जैसे पुत्र, पत्नी और धन तो सहज उपलब्ध होते हैं, जो किसी भी व्यक्ति के पास हो सकते हैं। लेकिन सच्चे संतों की संगत प्राप्त करना और भगवान की महिमा की कथा सुनना या सुनाना जीवन का एक ऐसा अवसर है जो बहुत ही दुर्लभ होता है और बड़े भाग्य से ही मिलता है। यह आत्म-कल्याण का मार्ग है और जीवन को सार्थक बनाता है। इसलिए भगवान शिव की कथा का श्रवण कीर्तन मनन करने से शिव तत्व की प्राप्ति होती है फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी के दिन प्रथम शिवलिंग का प्रादुर्भाव हुआ जो अरुणाचल शिव के नाम से विख्यात हुआ शिव कथा में गुरुदेव डॉ. संतरामानंदाचार्य जी ने अपने प्रवचन सुनाते हुए कहा कि शिवलिंग घर में पूजा करने के लिए एक अंगुल से 8 अंगुल और मंदिर में स्थापना के लिए 12 अंगुल से अधिक शिवलिंग रखना चाहिए शिवलिंग के निर्माण के भेद बताएं नर्मदेश्वर धातु के शिवलिंग आटे के शिवलिंग और जब कोई शिवलिंग न हो तो अपने बाए अंगूठे के शिवलिंग का स्वरूप मानकर शिव का पूजन करें ओम नमः शिवाय का जप करे नावेद भाषण पर विचार और बिल्व पत्र का महत्व बतलाया यदि वह शिव भक्त है शिव मंत्र का जाप करता है तो वह शिवलिंग का प्रसाद खा सकता है यदि उसने शिव मंत्र की दीक्षा नहीं ली है तो उसे शिवलिंग का प्रसाद नहीं खाना चाहिए उसे पर चण्ड का अधिकार होता है
रिपोर्टर : जितेन्द्र कुमार
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