सड़कों और सुरक्षा के नाम पर हमारी जागरूकता
हरदोई : हरदोई समेत पूरे प्रदेश में अक्सर यही तस्वीर देखने को मिलती है - सब कुछ सामान्य चलता रहता है, लेकिन जैसे ही कोई हादसा होता है या कोई त्योहार नजदीक आता है, तभी अभियान और कार्रवाई याद आती है।
सड़क सुरक्षा, ट्रैफिक नियम, अतिक्रमण हटाना - सब कुछ उसी वक्त दिखता है। सवाल यह नहीं कि कार्रवाई होती है। सवाल यह है कि यह जागरूकता साल भर क्यों नहीं रहती? अगर होती, तो शायद हादसों की खबरें इतनी आम न होतीं, और हर परिवार अपनी खुशियों की कीमत न चुकाता।
मिलावटखोरों के खिलाफ भी यही हाल है। त्योहारों के समय ही नमूने लिए जाते हैं, छापेमारी होती है और कार्रवाई की बातें होती हैं। लेकिन आम दिनों में वही दूध, खोया, पनीर मसाले समेत अन्य खाद्य सामग्रियां जो लोगों की सेहत से जुड़े हैं - खुलेआम बिकते रहते हैं।
ग्रामीण इलाकों की स्थिति और भी गंभीर है। वहां न सड़कें सुरक्षित हैं, न ट्रैफिक नियंत्रण प्रभावी। न ही मिलावट पर निरंतर निगरानी। हादसे और मिलावट, दोनों बार-बार सामने आते हैं, लेकिन व्यवस्था तब सक्रिय होती है जब शोर और दबाव बढ़ता है।
यह सवाल सिर्फ नियमों या विभागों का नहीं है। सवाल हमारी समझ और जिम्मेदारी का है। शासन-प्रशासन को अपना काम करने दें, साथ ही हम सब खुद भी जागरूक रहें। सड़कें सुरक्षित हों, नियमों का पालन हो,मिलावटखोरों पर निगरानी हो - इसके लिए सिर्फ शिकायत करने या इंतजार करने से काम नहीं चलेगा, हमारी सतर्कता और जिम्मेदारी भी जरूरी है।
और अंत में यही कहना चाहूंगा कि सुरक्षा, व्यवस्था और जनता की भलाई तभी सार्थक होती है, जब जिम्मेदारी और जागरूकता केवल अवसर आधारित न हो, बल्कि साल भर, रोज़मर्रा का हिस्सा बन जाए। तभी हरदोई की सड़कें सुरक्षित होंगी, हर खरीदारी भरोसेमंद होगी, और हम अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाते हुए व्यवस्था को और मजबूत बना पाएंगे।
रिपोर्टर : सी वी आजाद

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