कछौना में 'पीला आतंक': डीएम के आदेश की आड़ में सड़कों का कत्ल, डंपरों ने बनाया समसपुर को धूल का टापू
हरदोई : कछौना के समसपुर नहर के पास, जहाँ विकास के नाम पर विनाश का खेल खेला जा रहा है। आप इन भारी-भरकम मशीनों और डंपरों को देख सकते हैं। कहने को तो यह खनन जिलाधिकारी के आदेश पर हो रहा है, लेकिन सवाल यह है कि क्या जिलाधिकारी ने सड़कों को मलबे में तब्दील करने और आम जनता का दम घोंटने का आदेश दिया है?
"ये ओवरलोड डंपर, जिनमें UP41AT1792 और UP30AT7656 जैसे वाहन शामिल हैं, कछौना की सड़कों के लिए काल बन चुके हैं। क्षमता से अधिक भार लेकर दौड़ते इन डंपरों ने इलाके की सड़कों को छलनी कर दिया है। जाम की स्थिति ऐसी है कि आम जनमानस का पैदल चलना दूभर हो गया है।
सिर्फ सड़कें ही नहीं, यहाँ की आबोहवा में भी ज़हर घुल चुका है। बिना ढके दौड़ते इन डंपरों से उड़ती धूल ने लोगों का स्वास्थ्य बिगाड़ दिया है। दमा और सांस की बीमारियों का खतरा बढ़ गया है, लेकिन ठेकेदार की तिजोरी भरने के आगे जनता की जान सस्ती नज़र आ रही है।
हैरानी की बात तो तब होती है, जब सूचना के अधिकार और पारदर्शिता की बात करने पर 'खनन माफिया' अपनी औकात पर उतर आते हैं। जब हमारे साथी ने इनसे परमिट मांगा, तो जवाब मिला— 'तुम कौन होते हो मांगने वाले?' यह भाषा बताती है कि इन माफियाओं के हौसले कितने बुलंद हैं। क्या अब कछौना में प्रशासन का इक़बाल खत्म हो चुका है?
शिकायतें रद्दी के टोकरे में जा रही हैं और प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। क्या मान लिया जाए कि सरकारी तंत्र ने इन खनन माफियाओं के आगे घुटने टेक दिए हैं? क्या UP30AT7656 और UP41AT1792 जैसे ओवरस्पीड डंपर किसी बड़ी दुर्घटना का इंतज़ार कर रहे हैं?
कछौना की जनता पूछ रही है कि आख़िर कब तक नियमों की धज्जियाँ उड़ती रहेंगी और कब तक सड़कों पर यह 'पीला आतंक' अपनी मनमानी करता रहेगा? क्या शासन इस अवैध तांडव पर लगाम लगाएगा या फिर भ्रष्ट सांठ-गांठ की धूल में सच को ऐसे ही दबा दिया जाएगा?
संवाददाता : अनुराग सिंह


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