मानवता की मिसाल: जब राख के ढेर पर मुस्कान लाने पहुंचे डॉ. नृपेन्द्र और डॉ. काजल वर्मा

हरदोई : आग सिर्फ घर नहीं जलाती, वह बरसों के सपने, उम्मीदें और एक गरीब की जीवन भर की जमापूंजी को पल भर में राख कर देती है। आज ऐसा ही हुआ ग्राम सभा हथोड़ा के मजरा पहवाँ ग्राम में, जहाँ राममूर्ति और रामनिवास के घरों में लगी भीषण आग ने सब कुछ तबाह कर दिया।

खेतों की मिट्टी से कमाया हुआ अनाज, बेटी की गोद भराई के लिए बड़े अरमानों से खरीदे गए नए कपड़े और घर की महिलाओं के गहने... आज यहाँ सिर्फ धुंआ और काली राख बची है। रामदुलारी और पूनम की सिसकियाँ और बच्चों की सहमी हुई आँखें यह बताने के लिए काफी हैं कि यह परिवार इस समय किस दर्द से गुजर रहा है।
लेकिन इसी तबाही के बीच मानवता की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर भी देखने को मिली जैसे ही इस दुखद घटना की खबर समाज सेवी डॉ. नृपेन्द्र वर्मा और उनकी धर्मपत्नी डॉ. काजल वर्मा को मिली, वे एक पल की भी देरी किए बिना अपनी नन्ही बेटी एलेक्स वर्मा के साथ पीड़ितों के आँसू पोंछने पहुँच गए।
इन्होंने न केवल परिवार को सांत्वना दी, बल्कि अपनी तरफ से आर्थिक सहयोग प्रदान कर यह साबित कर दिया कि समाज में आज भी इंसानियत जिंदा है। डॉ. काजल वर्मा ने उन मासूम बच्चों को अपने हाथों से नए कपड़े पहनाए, जिनके बदन से आग ने उनकी मुस्कान छीन ली थी। यह सिर्फ कपड़ों का दान नहीं था, बल्कि एक टूटे हुए परिवार को फिर से खड़ा होने का हौसला था।
"डॉ. नृपेन्द्र वर्मा ने मौके से ही संबंधित अधिकारियों से फोन पर वार्ता की और पुरजोर मांग उठाई कि पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द सरकारी मुआवजा दिया जाए। उन्होंने दोनों भाइयों के लिए सरकारी आवास की भी अपील की ताकि ये परिवार फिर से एक छत के नीचे सुरक्षित महसूस कर सकें।
इस नेक काम में गरीब बेरोज़गार सेवा फाउंडेशन के पदाधिकारी इंद्रजीत वर्मा, कन्हैयालाल वर्मा, अजय भारती के साथ डॉ. अमरपाल, सत्यप्रकाश और पुष्पेंद्र ने भी अपना हाथ बढ़ाया और आर्थिक मदद सुनिश्चित की।
आज मजरा पहवाँ की यह मिट्टी भले ही आग से तप रही हो, लेकिन डॉ. नृपेन्द्र और डॉ. काजल वर्मा जैसे व्यक्तित्वों की संवेदनशीलता ने यहाँ सहानुभूति की ठंडक पहुँचाई है। अगर समाज का हर सक्षम व्यक्ति इसी तरह दुख की घड़ी में किसी का सहारा बन जाए, तो कोई भी परिवार खुद को बेसहारा महसूस नहीं करेगा।

रिपोर्टर : अनुराग सिंह 

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