विकास के दावों की खुली पोल, कीचड़ और गड्ढों में कैद ग्राम त्यौरी!
हरदोई - कछौना ग्राम त्यौरी में सरकारी कागजों में 'डिजिटल इंडिया' और 'स्वच्छ भारत' के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन इस गांव की ये तस्वीरें उन दावों के मुंह पर एक करारा तमाचा हैं! ये नालियां देखकर लगता है कि यहाँ सफाई कर्मचारी शायद साल में एक बार 'दर्शन' देने आते हैं। महीनों तक नालियां बजबजाती रहती हैं,सड़ांध मारती गंदगी ग्रामीणों का जीना मुहाल कर रही है,लेकिन प्रशासन कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है। क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी महामारी के फैलने का इंतजार कर रहे हैं?
प्रधान की 'निजी जागीर' बना सरकारी वाहन?
हैरानी की बात तो देखिए ! ग्राम प्रधान ने कूड़ा इकट्ठा करने के लिए सरकारी धन से वाहन तो खरीद लिए,लेकिन वो वाहन गांव की गलियों में कभी नजर नहीं आते। आरोप है कि प्रधान जी ने जनता की सुविधा के लिए आए इन वाहनों को अपनी निजी सेवा में लगा रखा है। क्या यही है पंचवर्षीय विकास का मॉडल? जनता के टैक्स के पैसे का ऐसा दुरुपयोग आखिर कब तक चलेगा?
जुलाई 2025 से 'बंद' है मुख्य मार्ग!
अशोक मिनी स्टोर के पास का गड्ढा... इसे गड्ढा कहना गलत होगा,यह तो हादसों को खुला निमंत्रण है! जुलाई 2025 से यह मुख्य मार्ग बंद पड़ा है। बच्चे और बुजुर्ग आए दिन यहाँ गिरकर चोटिल हो रहे हैं। शिकायतें फाइलों में दफन हैं,और समाधान के नाम पर यहाँ सिर्फ आश्वासन का झुनझुना पकड़ाया जा रहा है।
आस्था पर प्रशासनिक प्रहार
पीपल के पेड़ से लेकर देवी मंदिर तक खड़ंजा पास हुआ, बजट शायद ठिकाने भी लग गया,लेकिन जमीन पर एक ईंट तक नहीं लगी। जिस देवी मंदिर पर साल में दो बार भव्य मेले लगते हैं, वहां बारिश के समय पहुंचना किसी जंग जीतने जैसा है। क्या हमारी आस्था और ग्रामवासियों की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिकता में कहीं भी नहीं है?"
सीधा सवाल
आज 'ग्राउंड जीरो' से हमारा सीधा सवाल है जिला प्रशासन और ब्लॉक के अधिकारियों से—कि आखिर कब तक त्यौरी की जनता इस नर्क जैसी स्थिति में रहने को मजबूर रहेगी? क्या फाइलों में विकास की चमक दिखाकर जमीनी हकीकत को दबाया जा सकता है? हम चुप नहीं बैठेंगे, जब तक इन सवालों का जवाब नहीं मिलता और गांव की सूरत नहीं बदलती।
संवाददाता - अनुराग सिंह कछौना

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